ढोल की थाप पर थिरके रेगिस्तान के जहाज — पुष्कर मेले में ऊंट नृत्य प्रतियोगिता ने जीता देशी-विदेशी सैलानियों का दिल
(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर। अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेला 2025 अब अपने पूरे रंग में दिखाई दे रहा है। देशी-विदेशी पर्यटकों की बढ़ती भीड़ के बीच मेले में रोजाना आयोजित होने वाली पारंपरिक प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। शुक्रवार को पशुपालन विभाग की ओर से मेला मैदान में आयोजित ऊंट नृत्य प्रतियोगिता ने दर्शकों का मन मोह लिया।

रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंट जब ढोल और नगाड़ों की थाप पर थिरकने लगे, तो पूरा मेला मैदान तालियों की गूंज से गूंज उठा। ऊंट पालकों ने अपने ऊंटों को नचाने की कला में अनोखी प्रतिभा दिखाई — कोई ऊंट चारों पैरों पर ताल से ताल मिलाता नजर आया, तो कोई दो पैरों पर खड़ा होकर झूम उठा। दर्शकों ने इस अद्भुत नजारे को देखकर दांतों तले उंगलियां दबा लीं।
कार्यक्रम का सबसे रोमांचक क्षण तब आया जब एक छोटे बच्चे ने साहसिक प्रदर्शन करते हुए ऊंट के पैरों के नीचे नृत्य किया, जबकि उसके दादा ने अपने ऊंट के मुंह में गर्दन डालकर वीरता का प्रदर्शन किया। इन साहसिक करतबों ने वहां मौजूद सभी दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
मेला मैदान में देशी और विदेशी सैलानियों की भारी भीड़ ऊंटों के रंगीन परिधानों, गहनों और पारंपरिक सजावट से सजे नजारों को देखने के लिए उमड़ पड़ी। ऊंटों की झूमती चाल और उनके मालिकों की कमान में ताल पर थिरकते कदमों ने मानो पूरे पुष्कर को जीवंत कर दिया।
प्रतियोगिता के अंत में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले ऊंट पालकों को पशुपालन विभाग की ओर से सम्मानित और पुरस्कृत किया गया। यह आयोजन न केवल राजस्थान की लोकसंस्कृति की झलक पेश करता है, बल्कि देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव बन गया।

