​’डॉलर का संकट जंग से भी बदतर’: रॉबर्ट कियोसाकी ने चेताया, कहा— अब ‘फाइनेंशियल एजुकेशन’ ही एकमात्र सहारा

गौरव कोचर 

जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे शांति वार्ता की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक अर्थव्यवस्था के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों को चौंका दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपने कच्चे तेल (Crude Oil) के व्यापार में अमेरिकी डॉलर को पूरी तरह दरकिनार करते हुए चीनी मुद्रा युआन (Yuan) में भुगतान लेना शुरू कर दिया है।

​ईरान के इस एक फैसले ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में ‘डी-डलराइजेशन’ (De-dollarization) यानी डॉलर के प्रभुत्व को खत्म करने की बहस को फिर से हवा दे दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर ‘रिच डैड पुअर डैड’ (Rich Dad Poor Dad) के लेखक और मशहूर निवेश सलाहकार रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बड़ा बयान देकर दुनिया को आगाह किया है।

​डॉलर के पतन की शुरुआत? कियोसाकी का ट्वीट हुआ वायरल

​ईरान द्वारा डॉलर को छोड़े जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए रॉबर्ट कियोसाकी ने सोशल मीडिया पर एक बेहद गंभीर और चेतावनी भरा पोस्ट साझा किया है। कियोसाकी ने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया के लिए डॉलर का मौजूदा संकट किसी भी सैन्य युद्ध या जंग से कहीं ज्यादा बदतर है।

​”हम इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां कागज की मुद्रा (Fiat Currency) का साम्राज्य ढह रहा है। डॉलर का कमजोर होना किसी भी युद्ध से ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकता है क्योंकि यह सीधे आपकी जेब, आपकी बचत और आपके भविष्य पर हमला करता है।”

रॉबर्ट कियोसाकी

 

​कियोसाकी लंबे समय से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और डॉलर की अंधाधुंध छपाई के आलोचक रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान और चीन जैसे देशों का यह कदम डॉलर के वैश्विक वर्चस्व के अंत की शुरुआत है।

​वित्तीय साक्षरता (Financial Education) ही एकमात्र ढाल

​इस आर्थिक उथल-पुथल के बीच कियोसाकी ने आम लोगों को एक बेहद महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस आने वाले वित्तीय तूफान से बचने के लिए ‘फाइनेंशियल एजुकेशन’ (वित्तीय साक्षरता) ही एकमात्र हथियार है।

​कियोसाकी के अनुसार, पारंपरिक स्कूल और कॉलेज हमें पैसे के लिए काम करना सिखाते हैं, लेकिन यह नहीं सिखाते कि पैसे से अपने लिए कैसे काम कराया जाए। जब डॉलर जैसी वैश्विक मुद्राएं कमजोर होंगी, तब केवल वही लोग सुरक्षित रहेंगे जिन्हें यह पता होगा कि अपनी संपत्ति को ‘असली एसेट्स’ में कैसे सुरक्षित रखना है।

​कियोसाकी की 3 मुख्य सलाहें:

  • कागजी पैसे पर भरोसा कम करें: बैंक अकाउंट में पड़े कैश की वैल्यू महंगाई और गिरते डॉलर के कारण कम हो सकती है।
  • असली एसेट्स में निवेश: उन्होंने एक बार फिर लोगों को सोना (Gold), चांदी (Silver) और बिटकॉइन (Bitcoin) जैसे गिने-चुने और ठोस एसेट्स में निवेश करने की सलाह दी।
  • लगातार सीखें: बाजार के बदलते नियमों को समझने के लिए वित्तीय ज्ञान को बढ़ाना अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुका है।

​ईरान के फैसले का वैश्विक बाजार पर क्या होगा असर?

​विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा तेल के बदले युआन स्वीकार करना सिर्फ दो देशों का व्यापारिक मामला नहीं है। इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं:

क्षेत्र

संभावित प्रभाव

पेट्रो-डॉलर को झटका

पिछले कई दशकों से वैश्विक तेल व्यापार मुख्य रूप से डॉलर में होता आया है (जिसे पेट्रो-डॉलर कहा जाता है)। ईरान का यह कदम इस व्यवस्था की नींव हिला सकता है।

चीन के युआन की ताकत

तेल व्यापार में युआन का इस्तेमाल बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन की करेंसी की स्वीकार्यता और मजबूती तेजी से बढ़ेगी।

अन्य देशों पर असर

यदि रूस और ईरान के बाद अन्य तेल उत्पादक देश (जैसे ओपेक देश) भी डॉलर के बजाय अन्य मुद्राओं का रुख करते हैं, तो अमेरिका के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

क्या वाकई बदल रहा है ग्लोबल ऑर्डर?

​अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का इतिहास पुराना है, लेकिन इस बार लड़ाई हथियारों से ज्यादा आर्थिक मोर्चे पर लड़ी जा रही है। ईरान का यह कदम और उस पर रॉबर्ट कियोसाकी जैसी वैश्विक शख्सियत की यह चेतावनी साफ संकेत देती है कि आने वाले समय में दुनिया की आर्थिक व्यवस्था में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। ऐसे में आम निवेशकों के लिए सतर्क रहने और अपनी वित्तीय समझ को मजबूत करने का समय आ गया है।

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