जयपुर, 2 जुलाई/ गौरव कोचर/राजस्थान में कर चोरी, अवैध बिलिंग और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए सरकार को चूना लगाने वाले रैकेट के खिलाफ राज्य कर विभाग ने बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। विभाग द्वारा चलाए गए डेटा एनालिटिक्स आधारित एक विशेष सत्यापन अभियान में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस हाई-टेक अभियान के तहत जांचे गए कुल 60 संदिग्ध जीएसटी पंजीकरणों (GST Registrations) में से 32 पंजीकरण पूरी तरह फर्जी और अस्तित्वहीन पाए गए हैं। विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 15.73 करोड़ रुपए की अवैध आईटीसी को तुरंत ब्लॉक (अवरुद्ध) कर दिया है।
जोखिम विश्लेषण प्रणाली (Risk Analysis) से बिछाया जाल
विभाग के उच्च अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई पारंपरिक तरीकों के बजाय पूरी तरह आधुनिक तकनीक और डेटा माइनिंग पर आधारित थी। विभाग द्वारा विकसित की गई ‘जोखिम विश्लेषण आधारित चयन प्रणाली’ के जरिए प्रदेश भर में संदिग्ध लेन-देन और असामान्य व्यापारिक गतिविधियों वाले प्रोफाइल्स को शॉर्टलिस्ट किया गया था।
इन विश्लेषणात्मक संकेतकों (Analytical Indicators) के आधार पर कुल 60 संदिग्ध जीएसटी नंबरों को चिन्हित कर उनका जमीनी स्तर पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया गया। शुरुआती जांच में ही 60 में से 32 फर्में सिर्फ कागजों पर चलती मिलीं, जिनका धरातल पर कोई अस्तित्व नहीं था। शेष 28 चिन्हित मामलों में विभाग की गहन जांच अभी भी जारी है, जिससे विसंगति का यह आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है।
राजस्व को होने वाली भारी क्षति टली
इस विशेष अभियान की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि विभाग ने फर्जी फर्मों को पकड़ने के साथ ही टैक्स चोरी के लूपहोल को तुरंत बंद किया। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती सत्यापन के तुरंत बाद एक्शन लेते हुए अब तक 15.73 करोड़ रुपए के इनपुट टैक्स क्रेडिट पर रोक लगा दी गई है। इससे सरकारी राजस्व को होने वाली एक बड़ी सीधी हानि को समय रहते रोक लिया गया। बाकी बचे मामलों की स्क्रूटनी पूरी होने के बाद नियमानुसार सख्त वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
तकनीक बनी विभाग का अचूक हथियार
राज्य कर विभाग की यह सफलता यह साबित करती है कि अब टैक्स चोरों के लिए सिस्टम को चकमा देना नामुमकिन होता जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध और फर्जी नेटवर्क को पकड़ने में डेटा आधारित प्रणाली बेहद प्रभावी साबित हुई है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में विसंगतियों का सामने आना विभाग की तकनीकी क्षमता की एक बड़ी उपलब्धि है।
भविष्य में और कड़े होंगे एक्शन: विभाग की अपील
अवैध बिलिंग और फर्जी आईटीसी के जरिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले सिंडिकेट को चेतावनी देते हुए अधिकारियों ने साफ किया है कि यह अभियान यहीं रुकने वाला नहीं है। भविष्य में भी डेटा एनालिटिक्स पर आधारित ऐसे विशेष और औचक अभियान निरंतर जारी रहेंगे। जीएसटी अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत दोषियों और संलिप्त संस्थाओं के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही राज्य कर विभाग ने प्रदेश के सभी करदाताओं और व्यापारियों से एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि सभी व्यवसायी राज्य के आर्थिक विकास में भागीदार बनते हुए केवल वास्तविक और विधिसम्मत व्यापारिक लेन-देन ही करें तथा अवैध बिलिंग या फर्जी आईटीसी जैसी अवैध गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहें।