डिमांड राशि जमा, फिर भी अंधेरे में किसान: बिजली विभाग के चक्कर काटते-काटते घिस गईं जूतियां

योगेश शर्मा 

  • दावे हवा-हवाई: सरकार कहती है 24 घंटे में दो कनेक्शन, जमीन पर 10 दिन बाद भी चक्कर लगा रहे अन्नदाता
  • अस्थाई कनेक्शन के भरोसे पांच साल कटे, स्थाई के लिए वाटिका एईएन कार्यालय के काट रहे चक्कर

जयपुर। राजधानी से सटे पंवालिया रिंग रोड वाटिका क्षेत्र के खेतापुरा गांव के किसान इन दिनों बिजली विभाग की ढीली और लापरवाह कार्यप्रणाली से बेहद परेशान हैं। राज्य सरकार एक तरफ जहां डिमांड राशि जमा होने के महज 24 घंटे के भीतर विद्युत कनेक्शन जारी करने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। विद्युत विभाग के अधिकारियों की लेट-लतीफी के कारण किसान भीषण गर्मी और संकट के बीच दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

​5 साल का इंतजार और 10 दिन पहले जमा राशि, फिर भी ढाक के तीन पात

​खेतापुरा गांव के पीड़ित किसान रामनिवास शर्मा ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे पिछले पांच वर्षों से अपने घर में अस्थाई (टेंपरेरी) बिजली कनेक्शन के भरोसे गुजारा कर रहे हैं। स्थाई कनेक्शन पाने के लिए उन्होंने एक महीने पहले वाटिका स्थित सहायक अभियंता (AEN) कार्यालय में विधिवत प्रार्थना पत्र दिया था। विभाग की प्रक्रिया के अनुसार, करीब 10 दिन पहले उन्होंने मांगी गई पूरी डिमांड राशि भी जमा करवा दी।

​किसान का आरोप है कि डिमांड राशि जमा होने के बाद नियमतः कनेक्शन तुरंत हो जाना चाहिए था, लेकिन तब से लेकर आज तक वे सिर्फ बिजलीघर के चक्कर पर चक्कर लगा रहे हैं। अधिकारी आज-कल का बहाना बनाकर टरका रहे हैं, जिससे उनकी जूतियां घिस चुकी हैं।

​महिलाओं में आक्रोश: सरकार के दावों की पोल खोल रहे जेईएन-एईएन

​इस पूरे मामले को लेकर गांव की महिलाओं में भी भारी आक्रोश है। स्थानीय ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार आए दिन मंचों से घोषणाएं करती है कि डिमांड नोट जमा होते ही चौबीस घंटे में उपभोक्ता के घर रोशनी पहुंच जाएगी। लेकिन वाटिका कार्यालय में बैठे कनिष्ठ अभियंता (JEN) और सहायक अभियंता (AEN) सरकार की इन जनकल्याणकारी योजनाओं और दावों को पूरी तरह फ्लॉप साबित करने में तुले हैं। समय पर कृषि व घरेलू विद्युत कनेक्शन न मिलने से किसानों का पूरा शेड्यूल बिगड़ रहा है।

​अधिकारियों का पक्ष: पुलिस सुरक्षा का इंतजार

​इस पूरे मामले पर जब विभाग का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो क्षेत्र के कनिष्ठ अभियंता (JEN) मयंक शर्मा ने प्रशासनिक और तकनीकी दिक्कतों का हवाला दिया।

“हमने संबंधित थाने से पुलिस प्रोटेक्शन (सुरक्षा बल) की मांग की है। जैसे ही पुलिस जाब्ता उपलब्ध हो जाता है, मौके पर जाकर जल्द से जल्द पीड़ित किसान का स्थाई विद्युत कनेक्शन करवा दिया जाएगा।”

मयंक शर्मा, जेईएन (विद्युत विभाग, वाटिका)

 

बड़ा सवाल: अब देखना यह होगा कि विभाग को पुलिस प्रोटेक्शन कब मिलता है और पिछले पांच साल से स्थाई रोशनी का इंतजार कर रहे किसान रामनिवास शर्मा के घर और खेत को बिजली विभाग के इस ‘अंधेरे’ से कब तक मुक्ति मिलती है।

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