| हरि प्रसाद शर्मा
अजमेर। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने गुरुवार को अजमेर जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जिले के आला अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री का रुख बेहद सख्त नजर आया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की ‘पेंडेंसी’ (लंबित कार्य) बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बजट घोषणाओं पर ‘जीरो टॉलरेंस’
उपमुख्यमंत्री ने बैठक में जिले की बजट घोषणाओं और धरातल पर उनकी स्थिति का बारीकी से विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 18 से 19 महत्वपूर्ण बजट घोषणाएं की गई हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत को धरातल पर उतारा जा चुका है।
मुख्य निर्देश:
- समय सीमा: शेष लंबित घोषणाओं को तत्काल प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।
- राज्य स्तरीय निगरानी: उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 19 परियोजनाएं अभी भी प्रक्रियाधीन हैं, जिनकी मॉनिटरिंग अब सीधे राज्य स्तर से की जाएगी।
- जवाबदेही तय: उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जो प्रोजेक्ट देरी से चल रहे हैं, उनकी बाधाओं को दूर कर उन्हें गति दी जाए।
‘राइजिंग राजस्थान’ और आर्थिक विकास की समीक्षा
दीया कुमारी ने केंद्र और राज्य सरकार की आर्थिक योजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने ‘वन जिला-वन प्रोडक्ट’ (ODOP) की प्रगति जांची और ‘राइजिंग राजस्थान’ समिट के तहत हुए निवेश समझौतों (MoUs) के क्रियान्वयन की स्थिति देखी। उन्होंने कहा कि नियमित मॉनिटरिंग ही वह मुख्य कारण है जिससे वर्तमान सरकार में विकास कार्यों की गति पिछली सरकारों की तुलना में कहीं अधिक बेहतर है।
पेयजल संकट पर अग्रिम तैयारी के निर्देश
आगामी गर्मियों के मौसम को देखते हुए उपमुख्यमंत्री ने पेयजल व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने जलदाय विभाग के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि:
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- जिले में कहीं भी पीने के पानी की किल्लत पैदा न हो।
- गर्मियों के लिए ‘इमरजेंसी प्लान’ अभी से तैयार रखा जाए।
- आमजन को सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी देरी के मिलना सुनिश्चित हो।
”विकास कार्यों को अटकाना या लटकाना हमारी सरकार की कार्यशैली नहीं है। पेंडेंसी रखना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। अधिकारी जिम्मेदारी समझें और सुनिश्चित करें कि हर योजना का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचे।” — दीया कुमारी, उपमुख्यमंत्री
