ट्रंप प्रशासन का H-1B वीजा पर बड़ा प्रहार: फीस $100,000 के पार करने का प्रस्ताव, भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव

गौरव कोचर

अमेरिकी प्रशासन ने विदेशी कुशल कामगारों, विशेषकर आईटी प्रोफेशनल्स के लिए इस्तेमाल होने वाले लोकप्रिय H-1B वीजा नियमों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में गृह सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security – DHS) ने वीजा शुल्क को स्थायी रूप से बढ़ाकर $103,265 (लगभग 86 लाख रुपये से अधिक) करने का नया प्रस्ताव पेश किया है। अब तक यह शुल्क सामान्य तौर पर $2,000 से $5,000 के बीच रहता था। इस फैसले से भारतीय आईटी कंपनियों, बहुराष्ट्रीय कंसल्टेंसी फर्मों और अमेरिकी तकनीकी उद्योग में काम करने के इच्छुक लाखों कुशल पेशेवरों पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।

प्रस्तावित नियम और कानूनी विवाद

  • स्थायी बढ़ोतरी की तैयारी: पिछले वर्ष लागू की गई $100,000 की अस्थायी शुल्क वृद्धि सितंबर में समाप्त होने वाली है। इसके मद्देनजर DHS ने इसे स्थायी रूप से $103,265 करने का नया प्रारूप तैयार किया है।
  • अदालती चुनौतियां: इस अत्यधिक शुल्क वृद्धि के खिलाफ अमेरिका भर में कानूनी लड़ाई जारी है। बोस्टन स्थित संघीय अपीलीय अदालत उस पूर्व आदेश की समीक्षा कर रही है जिसमें इस शुल्क को अवैध ठहराया गया था।
  • उद्योग व राज्यों का विरोध: यू.एस. चैंबर ऑफ कॉमर्स, कई श्रमिक संगठन और डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्य इस नीति के खिलाफ कानूनी याचिकाएं दायर कर चुके हैं। नया नियम अंतिम रूप लेते ही इन मुकदमों में संशोधन की तैयारी है।

भारतीय आईटी उद्योग और ग्लोबल टेक कंपनियों पर असर

  • प्रमुख प्रायोजक दायरे में: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, HCL टेक और LTIMindtree जैसी प्रमुख भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियों के साथ डेलॉयट, पीडब्ल्यूसी और ईवाई (EY) जैसी कंसल्टेंसी फर्में H-1B वीजा के सबसे बड़े प्रायोजकों में शामिल हैं।
  • रणनीति में बदलाव: भारी भरकम शुल्क और सख्त नियमों के कारण गूगल, टेस्ला, अमेज़न और ओपनएआई जैसी टेक दिग्गज कंपनियों की हायरिंग रणनीतियों पर असर पड़ा है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब प्रतिभाओं को अमेरिका बुलाने के बजाय भारत में ही अपने ऑपरेशंस और डेवलपमेंट सेंटर्स का विस्तार कर रही हैं।
  • उद्योग संगठनों की अपील: भारत के तकनीकी उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों ने अमेरिकी प्रशासन से संवाद शुरू किया है। उनका तर्क है कि यह व्यवस्था अमेरिकी कंपनियों में कुशल श्रमिकों की कमी को दूर करने में अहम भूमिका निभाती है।

कड़ी जांच और घटते पंजीकरण के आंकड़े

  • सोशल मीडिया और बैकग्राउंड की जांच: विदेश विभाग ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों को आवेदकों के लिंक्डइन प्रोफाइल, रेज़्यूमे और पारिवारिक पृष्ठभूमि की बारीकी से जांच करने का निर्देश दिया है। तकनीकी क्षेत्र के उन आवेदकों की विशेष जांच की जा रही है जिन पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने वाले टूल्स से जुड़े होने का संदेह हो।
  • पंजीकरण में भारी गिरावट: यू.एस. सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के आंकड़ों के मुताबिक, वीजा आवेदनों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वर्ष लगभग 344,000 पंजीकरण हुए, जो 2024 की तुलना में 25% कम और 2023 (759,000) के मुकाबले आधे से भी कम हैं।
  • सीमित कोटा: वर्तमान में H-1B कार्यक्रम के तहत सालाना 65,000 सामान्य वीजा और उच्च डिग्री धारकों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा जारी किए जाते हैं, जो सामान्यतः 3 से 6 वर्षों के लिए मान्य होते हैं।

​अमेरिकी प्रशासन के इस कड़े कदम से स्थानीय स्तर पर हायरिंग को बढ़ावा देने का दावा किया जा रहा है, वहीं वैश्विक तकनीकी उद्योग का मानना है कि इससे नवाचार और कुशल कार्यबल की उपलब्धता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

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