ट्रंप के टैरिफ फैसले से बिगड़े भारत-अमेरिका रिश्ते, बढ़ सकता है रूस-चीन का नजदीकी
By : गौरव कोचर
टेलीग्राफ टाइम्स
अगस्त 09,2025
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने के फैसले से न केवल दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है, बल्कि अमेरिकी रणनीतिक हितों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को रूस और चीन के करीब धकेल सकता है, जो आने वाले समय में अमेरिका के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी – “खुद को नुकसान पहुंचा रहे ट्रंप”
जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और अर्थशास्त्री स्टीव हैंके ने ट्रंप की नीति को “पूरी तरह बकवास” बताते हुए कहा कि भारत को धैर्य रखना चाहिए क्योंकि ट्रंप की “ताश के पत्तों जैसी आर्थिक नीतियां” जल्द ही ढह सकती हैं। उन्होंने नेपोलियन का हवाला देते हुए कहा—”जब दुश्मन खुद को खत्म कर रहा हो, तो रास्ते में मत आओ।”
हैंके का कहना है कि अमेरिका में व्यापार घाटा बहुत अधिक है, क्योंकि वहां के लोग अपने सकल राष्ट्रीय उत्पाद से ज्यादा खर्च कर रहे हैं। ऐसे में टैरिफ की नीति समस्या का समाधान नहीं, बल्कि संकट को और बढ़ाएगी।
जॉन बोल्टन की दो टूक – “दोस्त खो रहे हैं ट्रंप”
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भी चेतावनी दी कि भारत पर सख्त टैरिफ और चीन को नरमी दिखाने की नीति दशकों की अमेरिकी कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर कर सकती है।
उन्होंने ‘द हिल’ में लिखे लेख में कहा कि भारत पर टैरिफ लगाना और चीन को रूसी तेल खरीद पर छूट देना “अमेरिका के लिए बड़ी गलती” है। इस नीति से अमेरिका का अपने मित्र देशों पर से विश्वास कम होगा, जबकि आर्थिक लाभ बेहद सीमित रहेंगे।
रूस-चीन की तीखी प्रतिक्रिया
रूस के क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि अमेरिका का दूसरे देशों को रूस से व्यापार तोड़ने के लिए मजबूर करना “कानूनी और नैतिक रूप से गलत” है।
चीन के राजदूत जू फीहोंग ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा—”बदमाश को एक इंच दो, वह एक मील ले लेगा,” और उनकी नीतियों को “अवैध और अस्थिर” बताया।
भारत का सख्त रुख
भारत ने अमेरिका के टैरिफ फैसले को “अनुचित और अन्यायपूर्ण” करार दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ किया कि भारत किसी भी आर्थिक दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि जब तक टैरिफ विवाद हल नहीं होता, तब तक भारत के साथ व्यापार वार्ता नहीं होगी। उन्होंने दावा किया कि टैरिफ से अमेरिकी शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था को फायदा हो रहा है, हालांकि अमेरिकी विशेषज्ञ उनकी बात से सहमत नहीं हैं।
कूटनीतिक पृष्ठभूमि
हाल ही में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का रूस दौरा, चीन में होने वाले SCO समिट में पीएम मोदी को आमंत्रण और पुतिन का आगामी भारत दौरा इस बात के संकेत माने जा रहे हैं कि भारत अपने रणनीतिक विकल्पों को मजबूत कर रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि भारत, रूस और चीन के बीच नजदीकी बढ़ती है, तो “अंकल सैम” यानी अमेरिका के लिए वैश्विक शक्ति समीकरण में बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।