ट्रंप की विदेश नीति और जे.डी. वेंस का बयान: रूस पर “आर्थिक दबाव”, भारत पर टैरिफ़ का असर
नई दिल्ली/वाशिंगटन |गौरव कोचर | टेलीग्राफ टाइम्स
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति का मकसद रूस को कमजोर करना और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए उस पर “आक्रामक आर्थिक दबाव” (Aggressive Economic Leverage) बनाना था।
वेंस ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित कई देशों से होने वाले आयात पर 50% तक का टैरिफ़ (Import Duty) इसी उद्देश्य से लगाया था। उनका कहना है कि यह कदम रूस की तेल-आधारित अर्थव्यवस्था पर चोट पहुँचाने के लिए था।
रूस पर सीधा दबाव
रूस-यूक्रेन युद्ध 2022 से जारी है और अमेरिका लगातार रूस पर प्रतिबंध लगाता आया है। वेंस के अनुसार, ट्रंप की रणनीति यह थी कि रूस को वैश्विक बाज़ारों में सीमित किया जाए, ताकि उसकी तेल और ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय कम हो और वह युद्ध को लंबे समय तक न चला सके।
भारत पर असर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। अमेरिकी टैरिफ़ का असर भारत पर सीधे पड़ा, क्योंकि भारत ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सबसे सस्ता और स्थायी सौदा करने को प्राथमिकता देता है।
भारत के रूस में राजदूत विनय कुमार ने हाल ही में कहा:
“भारत जहाँ से भी सबसे अच्छा सौदा मिलेगा, वहीं से तेल खरीदेगा। यह निर्णय पूरी तरह वाणिज्यिक है और 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए ज़रूरी है।”
यह बयान साफ़ करता है कि भारत अमेरिकी दबाव के बावजूद अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है।
अंतरराष्ट्रीय समीकरण
- अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से दूरी बनाए, ताकि रूस को राजस्व का बड़ा स्रोत न मिले।
- भारत तटस्थ रुख अपनाता है—वह रूस से तेल खरीदता है और अमेरिका-यूरोप के साथ भी व्यापारिक और रणनीतिक संबंध मज़बूत करता है।
- विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप की “आक्रामक आर्थिक नीति” ने वैश्विक व्यापार संतुलन को प्रभावित किया और भारत जैसे देशों को कठिन संतुलन साधने की स्थिति में डाल दिया।
जे.डी. वेंस का बयान दर्शाता है कि अमेरिका की विदेश नीति अब केवल सैन्य शक्ति पर नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव और व्यापारिक हथियारों पर आधारित है।
भारत इस दबाव को स्वीकार किए बिना, अपनी ऊर्जा ज़रूरतों और नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए “सबसे अच्छा सौदा” तलाशता रहेगा।