ट्रंप की अपील और पाकिस्तान का पासपोर्ट: जानिए क्यों छिड़ी है कूटनीतिक बहस

गौरव कोचर 

​अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ (Abraham Accords) का मुद्दा गरमा दिया है। ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच एक शांति समझौते के संदर्भ में पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम बहुल देशों से इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने और अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने की अपील की है।

​इस अपील ने पाकिस्तान के सामने एक बड़ी कूटनीतिक और प्रशासनिक दुविधा खड़ी कर दी है, जिसका सीधा संबंध उसके नागरिकों के पासपोर्ट से जुड़ा है।

​पाकिस्तान के पासपोर्ट पर क्या लिखा है?

​दुनिया के गिने-चुने देशों में शामिल पाकिस्तान अपने नागरिकों के पासपोर्ट पर इजराइल को लेकर एक बेहद सख्त और स्पष्ट पाबंदी दर्ज करता है। पाकिस्तानी पासपोर्ट के वैलिडिटी (वैधता) वाले पन्ने पर साफ शब्दों में लिखा होता है:

“This passport is valid for all countries of the world except Israel.”

(यह पासपोर्ट इजराइल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों के लिए मान्य है।)

 

​यह लाइन केवल एक यात्रा प्रतिबंध नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान की 1947 में अपनी आजादी के बाद से चली आ रही उस नीति का प्रतीक है, जिसके तहत वह इजराइल को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देता। पाकिस्तान के अलावा मलेशिया, बांग्लादेश और लीबिया जैसे कुछ अन्य देशों के पासपोर्ट पर भी इसी तरह की पाबंदी दर्ज है।

​ट्रंप इसे क्यों हटवाना चाहते हैं?

​डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पिछले राष्ट्रपति कार्यकाल (2020) के दौरान ऐतिहासिक ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ की शुरुआत की थी। इसके तहत संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे अरब देशों ने इजराइल के साथ अपने राजनयिक और आर्थिक संबंधों को सामान्य किया था।

​ट्रंप इस कूटनीतिक समझौते को और अधिक विस्तार देना चाहते हैं। ट्रंप की इस रणनीति के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • ईरान के खिलाफ क्षेत्रीय मोर्चा: ट्रंप मध्य पूर्व (West Asia) में ईरान के प्रभाव और उसके परमाणु कार्यक्रमों को संतुलित करने के लिए इजराइल और प्रमुख मुस्लिम देशों को एक मंच पर लाना चाहते हैं।
  • आर्थिक और रक्षा कूटनीति: इस समझौते के जरिए इजराइल के रक्षा निर्यात और आर्थिक संबंधों का दायरा उन देशों तक बढ़ेगा जो अब तक उससे दूर थे।
  • वैश्विक शांति का अमेरिकी फॉर्मूला: ट्रंप का मानना है कि यदि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये जैसे बड़े मुस्लिम देश इजराइल से हाथ मिलाते हैं, तो यह क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम होगा।

​यदि पाकिस्तान ट्रंप की इस बात को स्वीकार करता है और अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होता है, तो उसे इजराइल को मान्यता देनी होगी। कूटनीतिक संबंध स्थापित होते ही पाकिस्तान को अपने देश के सभी नागरिकों के पासपोर्ट को दोबारा प्रिंट करना होगा और उस पर से इजराइल की पाबंदी वाली इस ऐतिहासिक लाइन को हटाना पड़ेगा।

​पाकिस्तान का रुख: “समझौता नामंजूर”

​ट्रंप की इस सार्वजनिक अपील के तुरंत बाद पाकिस्तान सरकार की ओर से सख्त प्रतिक्रिया आई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पाकिस्तान किसी भी स्थिति में अब्राहम अकॉर्ड्स का हिस्सा नहीं बनेगा।

​पाकिस्तान का रुख पूरी तरह साफ है:

  1. मूल विचारधारा से समझौता नहीं: पाकिस्तान के अनुसार, इजराइल के साथ संबंध सामान्य करना उसकी बुनियादी राजनीतिक और धार्मिक विचारधारा के खिलाफ है।
  2. फिलिस्तीन का मुद्दा: पाकिस्तान का हमेशा से यह स्टैंड रहा है कि जब तक फिलिस्तीन विवाद का एक न्यायसंगत और ‘टू-स्टेट सोल्यूशन’ (स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य) नहीं निकल जाता, तब तक वह इजराइल को मान्यता नहीं देगा।

​यही कारण है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद पाकिस्तान इस कूटनीतिक लाइन को बदलने के मूड में नजर नहीं आ रहा है।

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