राजस्थान में बनेगा भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर
जयपुर
| योगेश शर्मा
अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया) की टीम ने जयपुर सेंटर कल्चर एंड आर्ट्स (जेसीसीए) परिसर में एक विशेष समारोह आयोजित कर जगन्नाथपुरी मंदिर, पुरी के मुख्य पुजारी दैतापति भवानीदास महाराज का सादर अभिनंदन किया। वर्तमान में महाराज राजस्थान की यात्रा पर हैं, जहाँ वे विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में सम्मिलित हो रहे हैं।
श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ स्वागत
समारोह में ‘आरतिया’ के प्रतिनिधिमंडल ने महाराज को पारंपरिक दुपट्टा और मोतियों की माला भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। अभिनंदन करने वालों में आशीष सर्राफ, प्रेम बियाणी, कैलाश शर्मा, ओ पी राजपुरोहित, आनंद पोद्दार, रमेश मित्तल, सज्जन सिंह, दिनेश गुप्ता, सुरेश बंसल, दिनेश शर्मा, जगन्निधि जत्ती तथा ललित भारद्वाज शामिल रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में जेसीसीए के तरुण सारडा ने आगंतुक अतिथियों का परिचय कराया, वहीं ओ पी राजपुरोहित ने जगन्नाथ पुरी धाम के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डाला।
विज्ञान को चुनौती देता जगन्नाथ धाम: भवानीदास महाराज
अपने उद्बोधन में दैतापति भवानीदास महाराज ने जगन्नाथपुरी धाम की महिमा का वर्णन करते हुए कुछ ऐसे तथ्य साझा किए जो आधुनिक विज्ञान के लिए भी अबूझ पहेली हैं। उन्होंने बताया:
- प्रसाद पकाने की अनूठी विधि: मंदिर में सात हांडियों को एक के ऊपर एक रखकर चूल्हे पर खिचड़ी पकाई जाती है। आश्चर्यजनक रूप से सबसे ऊपर वाली हांडी का प्रसाद सबसे पहले पकता है, जबकि उसे आंच सबसे अंत में मिलती है।
- साक्षात देव: महाराज ने कहा कि भगवान जगन्नाथ साक्षात रूप में वहां विराजमान हैं। उन्होंने महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति के लिए स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जगन्नाथ धाम में दर्शन की सलाह दी थी।
राजस्थान में बनेगा जगन्नाथ मंदिर: नई धार्मिक पहल
समारोह में महाराज ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि राजस्थान में भगवान जगन्नाथ का एक भव्य मंदिर बनाने की योजना है। यह मंदिर पूरी तरह से विधि और शास्त्र सम्मत होगा। उन्होंने कहा कि इस मंदिर के निर्माण को लेकर राजस्थान के लोगों में जबरदस्त उत्साह और सकारात्मक भाव है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बल
’आरतिया’ के अध्यक्ष विष्णु भूत और चेयरमैन कमल कंदोई ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यदि राजस्थान में जगन्नाथ मंदिर का निर्माण होता है, तो यह प्रदेश की धार्मिक पर्यटन इकोनॉमी (Religious Tourism Economy) के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भक्तों को राजस्थान में ही पुरी की दिव्यता का अनुभव होगा।
