छत्तीसगढ़
झूठी शिकायत में आरोपित सहायक पशु चिकित्सक सुरेन्द्र सिंह भाटिया बेदाग़ साबित
चिमटापानी औषधालय प्रकरण में विभागीय जांच से हुआ खुलासा
Edited By: गणपत चौहान
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 24, 2025
रायगढ़/घरघोड़ा, 24 मई 2025:
विकासखंड घरघोड़ा अंतर्गत चिमटापानी स्थित पशु औषधालय में कार्यरत सहायक पशु चिकित्सक सुरेन्द्र सिंह भाटिया पर लगाए गए गंभीर आरोपों को विभागीय जांच ने निराधार एवं मनगढ़ंत करार दिया है। यह जांच 23 मई को गठित तीन सदस्यीय समिति द्वारा की गई थी, जिसमें भाटिया को बेदाग़ पाया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
6 मई 2025 को गुरुनाम सिंह नामक व्यक्ति, जो भाटिया का सगा भांजा बताया जा रहा है, ने रायगढ़ कलेक्टर के जनदर्शन कार्यक्रम में एक लिखित शिकायत दी। शिकायत में 67 ग्रामीणों के नाम व हस्ताक्षर के साथ सुरेन्द्र सिंह भाटिया पर विभागीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
गौर करने योग्य बात यह है कि गुरुनाम सिंह पूर्व में भी भाटिया के विरुद्ध ऐसी ही शिकायतें करता रहा है, जो जांच में असत्य सिद्ध हुई थीं। माना जा रहा है कि इन शिकायतों के पीछे पारिवारिक रंजिश और व्यक्तिगत द्वेष की भावना है।

जांच समिति की कार्रवाई
23 मई को डॉ. ललित कुमार विश्वाल (लेलुंगा), डॉ. चितरंजन (धौराभाठा), और डॉ. दिनेश कुमार (घरघोड़ा) के नेतृत्व में एक जांच समिति चिमटापानी पहुंची। समिति ने गांव में जाकर ग्रामीणों से पूछताछ की और औषधालय के सभी दस्तावेज़ों, पंजी, रजिस्टर आदि की गहनता से जांच की। सभी अभिलेख अद्यतन एवं विधिवत संधारित पाए गए।
फर्जी नाम और हस्ताक्षर का हुआ पर्दाफाश
जांच के दौरान जब 67 कथित शिकायतकर्ताओं के नाम पूछे गए, तो उनमें से केवल 4 व्यक्ति ही वास्तविक निकले वह भी फर्जी हस्ताक्षर फर्जी पाए गए।
उपस्थित ग्रामीण जयलाल राठिया, भिक्षा दास लाल राठिया, श्याम सुंदर राठिया आदि ने स्पष्ट किया कि उनके नाम व हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया गया है।
ग्रामीण सोहन दास ने बताया, “डॉ. भाटिया समय पर औषधालय पहुंचते हैं, नियमित सेवा करते हैं और पशुपालकों की हरसंभव मदद करते हैं।”
ग्रामीणों के अनुसार, यह पूरी शिकायत एक सोची-समझी साजिश थी, जो सुरेन्द्र सिंह भाटिया की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से की गई।
शिकायतकर्ता जांच में शामिल नहीं हुआ
जांच समिति ने शिकायतकर्ता गुरुनाम सिंह को मौके पर बुलाया, लेकिन वह न तो उपस्थित हुआ और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया। इससे यह मामला और भी संदिग्ध बन गया।
पूर्व शिकायत भी पाई गई थी फर्जी
यह भी सामने आया है कि दिसंबर 2024 में भी गुरुनाम सिंह और उसके भाई द्वारा सुरेन्द्र सिंह भाटिया के विरुद्ध इसी प्रकार की शिकायत की गई थी, जिसे विभागीय जांच में खारिज कर दिया गया था।
यह प्रकरण दर्शाता है कि व्यक्तिगत दुर्भावना से प्रेरित झूठी शिकायतें न केवल ईमानदार अधिकारियों की प्रतिष्ठा पर आघात करती हैं, बल्कि उनके मनोबल को भी प्रभावित करती हैं। सुरेन्द्र सिंह भाटिया विभागीय जांच में पूर्णतः निर्दोष पाए गए हैं और उन्हें कार्य से निष्ठा तथा ईमानदारी के लिए ग्रामीणों से सराहना भी प्राप्त हो रही है।