झंडे की रस्म अदायगी के साथ गरीब नवाज के 814वें उर्स का आगाज
चांद दिखने के बाद 21–22 दिसंबर से होंगी विधिवत धार्मिक रस्में
| रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर
अजमेर।
सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के सालाना 814वें उर्स की अनौपचारिक शुरुआत बुधवार को परंपरागत झंडे की रस्म के साथ हो गई। यह ऐतिहासिक रस्म दरगाह शरीफ के बुलंद दरवाजे पर अदा की गई, जिसे भीलवाड़ा से आए गौरी परिवार ने निभाया। इस अवसर पर देशभर से आए हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी में दरगाह परिसर “ख्वाजा के दीवाने” की सदाओं से गूंज उठा और पूरा माहौल सूफियाना रंग में रंग गया।
असर की नमाज के बाद गरीब नवाज गेस्ट हाउस से भव्य जुलूस रवाना हुआ। जुलूस में शाही चौकी के कव्वालों ने मनमोहक कव्वालियां पेश कीं, वहीं बैंड-बाजों के साथ जुलूस लंगरखाना गली होते हुए निजाम गेट से दरगाह में दाखिल हुआ और बुलंद दरवाजे तक पहुंचा। जैसे ही झंडा बुलंद दरवाजे पर चढ़ाया गया, अकीदतमंदों में उत्साह और श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। जायरीन अपनी-अपनी मन्नतों के साथ झंडे को छूने और चूमने की ख्वाहिश पूरी करते नजर आए।
दशकों पुरानी परंपरा
झंडे की रस्म निभाने वाले गौरी परिवार ने बताया कि यह परंपरा दशकों से चली आ रही है। वर्ष 1928 में फखरुद्दीन गौरी के पीर-ओ-मुर्शिद अब्दुल सत्तार बादशाह ने सबसे पहले यह रस्म अदा की थी। इसके बाद 1944 में यह जिम्मेदारी लाल मोहम्मद गौरी को सौंपी गई। उनके इंतकाल के बाद 1991 से उनके पुत्र मोईनुद्दीन गौरी ने यह जिम्मेदारी निभाई और 2007 से फखरुद्दीन गौरी लगातार इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
झंडा—उर्स की दस्तक का पैगाम
बताया जाता है कि पहले जब बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ाया जाता था, तो वह आसपास के गांवों तक साफ दिखाई देता था। उस दौर में मकान छोटे होते थे और बुलंद दरवाजा दूर से नजर आता था। झंडा देखकर ही लोगों को यह संदेश मिल जाता था कि पांच दिन बाद गरीब नवाज का उर्स शुरू होने वाला है। इसी तरह यह खबर गांव-दर-गांव फैल जाती थी और जायरीन उर्स की तैयारियों में जुट जाते थे।
चांद दिखते ही विधिवत शुरुआत
रजब का चांद दिखाई देने के बाद 21 या 22 दिसंबर से उर्स की विधिवत धार्मिक रस्में आरंभ होंगी। इन दिनों महफिल-ए-समां, चादर पेशी, जियारत, लंगर और अन्य पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन अजमेर पहुंचेंगे।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
बीते दिनों दरगाह को बम से उड़ाने की धमकी के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। झंडे की रस्म के दौरान भारी संख्या में पुलिस जाब्ता तैनात रहा, सीसीटीवी निगरानी और प्रवेश बिंदुओं पर सघन जांच की गई। प्रशासन ने उर्स के दौरान भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
श्रद्धा, परंपरा और सूफियाना रंग के साथ गरीब नवाज के 814वें उर्स का आगाज पूरे शानो-शौकत और आस्था के माहौल में हुआ, जिसने अजमेर को एक बार फिर इंसानियत, प्रेम और भाईचारे के पैगाम से सराबोर कर दिया।

