प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ना विकसित भारत की शक्ति, पांडुलिपियां भविष्य की प्रेरणा: उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी
जयपुर/ मुस्कान तिवाड़ी/संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम मिशन” के अंतर्गत राजस्थान में सोमवार को जयपुर के झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में “पांडुलिपि डिजिटलीकरण कार्यशाला” का आयोजन किया गया। इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन तथा कला एवं संस्कृति मंत्री दिया कुमारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास विशिष्ट अतिथि रहे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि पांडुलिपियां केवल पुराने दस्तावेज या ग्रंथ भर नहीं हैं, बल्कि ये भारत के हजारों वर्षों के समृद्ध साहित्य, परंपरा, इतिहास और दर्शन की अमूल्य धरोहर हैं। इनमें पूर्वजों के अनुभव, गहन शोध और ज्ञान का भंडार सुरक्षित है। पांडुलिपियां अतीत की गाथा कहने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों के मार्गदर्शन का आधार भी बनती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित “ज्ञान भारतम मिशन” हमारी प्राचीन विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। केंद्र सरकार का संकल्प है कि देश का ज्ञान भंडार पुस्तकालयों और अलमारियों तक सीमित न रहकर आधुनिक तकनीक के जरिए वैश्विक पटल पर पहुंचे और विकसित भारत के निर्माण में सहायक सिद्ध हो। इस कार्ययोजना को केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के मार्गदर्शन में धरातल पर उतारा जा रहा है।
दिया कुमारी ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। राजस्थान में राजकीय एवं निजी संग्रहों, पुस्तकालयों, मंदिरों, मठों और व्यक्तिगत धरोहरों से अब तक लगभग 23 लाख पांडुलिपियों का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इनमें से 1.24 लाख पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण भी किया जा चुका है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य की प्रत्येक ऐतिहासिक पांडुलिपि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है, जिससे युवा शोधार्थी, विद्यार्थी और आमजन शास्त्रों, आयुर्वेद, ज्योतिष एवं साहित्य के ज्ञान से सरलता से लाभान्वित हो सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु जिला स्तर पर संरक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे तथा निजी संग्रहकर्ताओं को भी इस मुहिम से सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा।
प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर: मुख्य सचिव
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने पांडुलिपियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान हैं। ज्ञान भारतम मिशन इन्हें भविष्य के लिए सुरक्षित रखने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। राजस्थान का इतिहास और ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि मिशन की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों के संस्कृत विभागों को जोड़कर तालपत्रों के वैज्ञानिक संरक्षण और संस्कृत शब्दावली के निर्माण की दिशा में ठोस कार्य किया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों के मध्य सुदृढ़ समन्वय पर बल देते हुए कहा कि युवाओं को पांडुलिपि शोध के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। जब यह ज्ञान तकनीकी माध्यमों से सुलभ होगा, तो राजस्थान सहित पूरे देश की ज्ञान परंपरा को विश्व स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्राप्त होगी।
राजस्थान बना रोल मॉडल
कार्यशाला के दौरान ज्ञान भारतम मिशन के राजस्थान समन्वयक डॉ. सुरेंद्र शर्मा ने राज्य की प्रगति पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत कराया कि किस प्रकार राजस्थान इस मिशन में एक रोल मॉडल के रूप में उभरा है।
कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय (नई दिल्ली) के संयुक्त सचिव समीर नंदा, निदेशक इंद्रजीत सिंह, पर्यटन विभाग की आयुक्त रुक्मणी रियार, कला एवं संस्कृति विभाग के शासन उप सचिव अनुपम कायल, राजस्थान संस्कृत अकादमी की निदेशक डॉ. लता श्रीमाली, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की संयुक्त निदेशक कृष्णकांता शर्मा, रवींद्र मंच की प्रबंधक कविता गोदारा तथा ज्ञान भारतम के सहायक नोडल अधिकारी रजनीश हर्ष सहित अनेक गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे।