जेकेके में आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में पर्यटन, कला एवं संस्कृति के दो वर्षों की उपलब्धियों ने खींचा ध्यान
राजस्थान की संस्कृति और इतिहास से जुड़े दुर्लभ अभिलेखों के 1 करोड़ 70 लाख पृष्ठों के डिजिटाइजेशन की जानकारी से आगंतुक हुए खासे प्रभावित
| नरेश गुनानी
18 दिसम्बर 2025
जयपुर। राज्य सरकार के कार्यकाल के शानदार दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जयपुर स्थित जवाहर कला केन्द्र में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से 15 दिसम्बर से आयोजित चार दिवसीय राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में पर्यटन विभाग तथा कला एवं संस्कृति विभाग की स्टॉल पर आगंतुकों का भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।
प्रदर्शनी में स्टूडेंट्स के साथ-साथ पर्यटन, कला एवं संस्कृति प्रेमी तथा अन्य विजिटर्स बड़ी संख्या में राजस्थान के प्रमुख पर्यटन डेस्टिनेशनों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही राज्य सरकार के विगत दो वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में किए गए विकासात्मक और नवाचारी कार्यों की विस्तृत जानकारी भी आगंतुकों को आकर्षित कर रही है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन, कला एवं संस्कृति तथा पुरातत्व एवं अभिलेखागार प्रवीण गुप्ता की पहल पर इस भव्य प्रदर्शनी में पर्यटन विकास के विभिन्न आयामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ ही विरासत और विकास के संतुलन को दर्शाते हुए राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर से जुड़े अभिलेखों को पहली बार इतने सुव्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप में प्रदर्शित किया गया है।
प्रदर्शनी की एक बड़ी विशेषता यह है कि राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर द्वारा प्रदेश की प्राचीन संस्कृति और इतिहास से जुड़े लगभग 1 करोड़ 70 लाख दुर्लभ अभिलेख पृष्ठों का डिजिटाइजेशन पूर्ण किया जा चुका है। इस डिजिटाइजेशन के माध्यम से राजस्थान आने वाले शोधकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों को महत्वपूर्ण शोध सामग्री और संदर्भ जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। यह जानकारी जानकर आगंतुक खासे प्रभावित नजर आ रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, अतिरिक्त मुख्य सचिव की पहल से राजस्थान संस्कृत अकादमी में संरक्षित 500 से 700 वर्ष प्राचीन दुर्लभ पांडुलिपियों को भी पहली बार आमजन के लिए प्रदर्शित किया गया है। कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र और कपड़े पर लिखी इन पांडुलिपियों में दर्शनशास्त्र, आयुर्वेद, रामायण, ज्योतिष और पौराणिक विषयों से संबंधित ग्रंथ विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत कार्य करने में राजस्थान का देशभर में प्रथम स्थान रहना भी प्रदर्शनी में प्रमुख रूप से दर्शाया गया है।
पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग की स्टॉल पर प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण की पारंपरिक और आधुनिक दोनों विधियों को प्रदर्शित किया गया है। पांडुलिपियों के संरक्षण में उपयोग होने वाली सामग्री, तकनीक और प्रक्रिया की जानकारी भी आगंतुकों को दी जा रही है, जिससे विरासत संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ रही है।
कुल मिलाकर, यह राज्य स्तरीय प्रदर्शनी न केवल पर्यटन विकास की उपलब्धियों को सामने ला रही है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और ज्ञान परंपरा को भी प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुंचाने में सफल साबित हो रही है।

