नरेश गुनानी
अजमेर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पद्मिनी एकादशी के पावन अवसर पर भीषण गर्मी के बीच जीव-जंतुओं के संरक्षण और सेवा का एक बड़ा संदेश दिया है। बुधवार को अजमेर स्थित अपने आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने 51 परिंडों (पक्षियों के लिए पानी के पात्र) का वितरण कर इस पुण्य अभियान की शुरुआत की।
बढ़ते तापमान और जल संकट के इस दौर में उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे बेजुबान पक्षियों और गौवंश के लिए पानी व दाने की समुचित व्यवस्था करें।
’जीव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा’
परिंडा वितरण के दौरान वासुदेव देवनानी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में आदि काल से ही जीव सेवा को सबसे बड़ा पुण्य का कार्य माना गया है। उन्होंने कहा:
”वर्तमान समय में बढ़ता तापमान और जल संकट हम सभी के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में पशु-पक्षियों की सुरक्षा और उनका संरक्षण किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने नागरिकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि सभी लोग अपने घरों की छतों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों पर परिंडे लगाएं और यह सुनिश्चित करें कि उनमें नियमित रूप से पानी भरा जाए।
छोटे प्रयास, बड़े परिणाम
विधानसभा अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि हमारे छोटे-छोटे प्रयास भी इन बेजुबान जीवों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत पहुंचा सकते हैं। गर्मी के इस क्रूर मौसम में पक्षियों के लिए पानी की एक-एक बूंद जीवनदायिनी साबित होती है। उन्होंने युवाओं, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) से भी आह्वान किया कि वे आगे आएं और इस जनकल्याणकारी अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।
महाअभियान: आज बांटे जाएंगे 500 परिंडे और 200 पानी की टंकियां
बुधवार को अपने आवास से इस मुहिम की शुरुआत करने के बाद, वासुदेव देवनानी गुरुवार को अजमेर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में एक बड़े स्तर पर अभियान चलाएंगे।
इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और बेजुबान जीवों के प्रति संवेदनशील बनाना है।
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वितरण सामग्री |
संख्या |
मुख्य उद्देश्य |
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पक्षियों के लिए परिंडे |
500 |
भीषण गर्मी में पक्षियों को पानी उपलब्ध कराना |
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गायों के लिए पानी की टंकियां |
200 |
सड़कों |
इस अभियान के माध्यम से अजमेर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में पर्यावरण और जीव संरक्षण के प्रति एक सकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।