जीएसटी सुधारों से ट्रंप के टैरिफ का असर होगा कम : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 28 अगस्त 2025 गौरव कोचर। टेलीग्राफ टाइम्स
भारत में लागू किए जाने वाले आगामी वस्तु एवं सेवा कर (GST) सुधार अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए नए टैरिफ (आयात शुल्क) के असर को संतुलित कर सकते हैं। यह दावा बीएमआई (BMI) नामक रिसर्च संस्था ने किया है, जो फिच सॉल्यूशंस (Fitch Solutions) की एक इकाई है।
टैरिफ के बावजूद मजबूत वृद्धि दर
रिपोर्ट के अनुसार, भले ही अमेरिकी टैरिफ कुछ क्षेत्रों पर नकारात्मक असर डालें, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था इस दशक के अंत तक 6% से अधिक की विकास दर बनाए रखने में सक्षम होगी। बीएमआई का कहना है कि भारत एशिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।
बीएमआई ने अनुमान लगाया है कि FY2025–26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 5.8% और FY2026–27 में 5.4% रह सकती है। पहले आशंका जताई गई थी कि टैरिफ में 25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी से विकास दर में 0.2 प्रतिशत अंक की कमी आ सकती है, लेकिन अब संशोधित आकलन में असर को सीमित माना गया है।
जीएसटी सुधारों से खपत को बढ़ावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि आगामी जीएसटी सुधारों का उद्देश्य कर दरों को घटाकर और ढांचे को सरल बनाकर घरेलू खपत (Private Consumption) को प्रोत्साहित करना है। अगर प्रस्तावित दो-स्तरीय कर संरचना (Two-slab tax structure) लागू होती है, तो रोज़मर्रा की कई वस्तुएं सस्ती होंगी।
इससे न केवल उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा, बल्कि ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवाएँ, सीमेंट और उपभोक्ता वस्तुओं जैसे क्षेत्रों की लाभप्रदता (Profitability) में भी सुधार देखने को मिलेगा।
आयकर कटौती का असर भी शामिल
एसबीआई रिसर्च की एक अलग रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी सुधार और हालिया आयकर कटौती (Income Tax Cuts) को मिलाकर कुल मिलाकर ₹5.31 लाख करोड़ तक की अतिरिक्त खपत हो सकती है। यह देश की जीडीपी का लगभग 1.6% है।
फिच का आकलन
इस बीच, फिच रेटिंग्स ने भारत की सॉवरेन रेटिंग ‘BBB’ के साथ स्थिर (Stable) परिप्रेक्ष्य में बनाए रखी है। फिच का कहना है कि अमेरिका के टैरिफ का भारत की कुल विकास क्षमता पर असर सीमित रहेगा।
रिपोर्ट का समग्र संदेश यह है कि —
- अमेरिका के टैरिफ से कुछ उद्योग प्रभावित होंगे,
- लेकिन जीएसटी सुधार और आयकर कटौती से घरेलू खपत मजबूत होगी,
- भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6% से ऊपर रहने की संभावना है,
- और भारत एशिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा।