1.50 करोड़ रुपये की लागत से सुदृढ़ हुआ ढाणियों का पेयजल तंत्र
तीन उच्च जलाशयों और नई पाइपलाइनों से 2,805 ग्रामीणों को मिला सीधा लाभ
जनवरी 2025 में कार्यादेश जारी होने के बाद तय समय में पूरे किए गए निर्माण कार्य
नरेश गुनानी/फलोदी। पश्चिमी राजस्थान के दूरदराज इलाकों में कभी पानी का इंतजार रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे बड़ा संघर्ष हुआ करता था। दैनिक जरूरतों के लिए पानी जुटाना ग्रामीणों के लिए कठिन चुनौती थी और हर परिवार की यही आस रहती थी कि घर तक नियमित और पर्याप्त पानी पहुंचे। फलोदी जिले के लोहावट क्षेत्र की तीन ढाणियों—सुथारों की ढाणी (इन्द्रनगर), डूडियो की ढाणी (सदरी) और पुनियों की ढाणी (नौसर)—में अब यह लंबा इंतजार खत्म हो चुका है और पेयजल आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह बदल गई है।
मुख्यमंत्री बजट घोषणा से मिला मजबूत आधार
ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत दूर करने के लिए मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत इन तीनों ढाणियों के लिए करीब 1.50 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई थी। योजना के तहत 15 जनवरी, 2025 को कार्यादेश जारी कर धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करवाए गए। तय समयसीमा में तीन नए उच्च जलाशयों (ओवरहेड वाटर टैंक) का निर्माण, नई वितरण पाइपलाइन बिछाने और आवश्यक तकनीकी कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
2,805 ग्रामीणों के दैनिक जीवन में आया बड़ा बदलाव
योजना के धरातल पर उतरने से आज लोहावट क्षेत्र की इन तीनों ढाणियों के 2,805 ग्रामीणों को सीधा लाभ मिल रहा है। सुथारों की ढाणी, डूडियो की ढाणी और पुनियों की ढाणी में बुनियादी ढांचा सुदृढ़ होने से अब घरों तक नियमित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। ग्रामीणों को अब पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।
ढाणियों तक पहुंची विकास की वास्तविक पहुंच
ग्रामीणों के अनुसार पानी की उपलब्धता केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि जीवन की बुनियादी सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री बजट घोषणा के जरिए किए गए इस कार्य से साबित हुआ है कि विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहकर दूर-दराज की ढाणियों तक पहुंच रहा है। नए जलाशयों और बिछी पाइपलाइनों ने इन ढाणियों के निवासियों के जीवन में सुविधा, राहत और व्यवस्था के प्रति एक नया भरोसा कायम किया है।