सुनील शर्मा
जयपुर, 08 अप्रैल 2026
राजस्थान की कला और संस्कृति के प्रमुख केंद्र, जवाहर कला केन्द्र (JKK) ने बुधवार को अपने गौरवशाली सफर के 33 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय स्थापना दिवस समारोह के प्रथम दिन प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की मुख्य विशेषता ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ के तहत प्रशिक्षण ले रहे बाल लोक कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियां रहीं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
नवाचार: पहली बार बाल कलाकारों को मिला मंच
कला एवं संस्कृति विभाग की संयुक्त सचिव एवं जवाहर कला केन्द्र की अतिरिक्त महानिदेशक अनुराधा गोगीया ने बताया कि इस वर्ष समारोह में एक विशेष नवाचार किया गया है। पहली बार मुख्य समारोह के मंच पर बाल लोक कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया है। रंगायन सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का आगंतुकों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की झलक
समारोह के दौरान राजस्थान के विभिन्न अंचलों की विविध लोक कलाओं का प्रदर्शन किया गया:
- लंगा गायकी की सुमधुर तान: सादिक खान लंगा और उनके समूह ने कार्यक्रम की शुरुआत “गजानंद जी आवो” से की। इसके बाद उन्होंने “चैरा री माखी”, “चरखो”, “जीवडो” और “धोरा वालो देश” जैसे प्रसिद्ध लोकगीतों के माध्यम से मरु-संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की।
- चरी नृत्य का संतुलन: कृष्णा मालीकर और उनके समूह के नन्हे कलाकारों ने सिर पर जलती चरी (मटकी) रखकर अद्भुत संतुलन का परिचय दिया। इस पारंपरिक मांगलिक नृत्य के सौंदर्य ने दर्शकों को बांधे रखा।
- शेखावाटी का चंग नृत्य: बनवारी एवं दल के बाल कलाकारों ने चंग और ढप की थाप पर बांसुरी की सुरीली धुन के साथ ऊर्जावान नृत्य प्रस्तुत किया। शेखावाटी क्षेत्र की इस जीवंत प्रस्तुति ने पूरे सभागार को लोक रंग में सराबोर कर दिया।
- डांडी गैर और मारवाड़ी घूमर: कार्यक्रम का भव्य समापन बालोतरा के दिनेश एवं उनके समूह द्वारा किया गया। ढोल-थाली की थाप पर सधी हुई लय के साथ “घेरा” और “सठिया” का प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद मनमोहक मारवाड़ी घूमर ने सभी का दिल जीत लिया।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
कार्यक्रम के दौरान देखा गया कि बाल कलाकारों में लोक परंपराओं के प्रति गहरी समझ और उत्साह है। यह इस बात का प्रमाण है कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ा रही है। जवाहर कला केन्द्र का यह प्रयास प्रदेश की लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है।
आगामी कार्यक्रम: 09 अप्रैल
स्थापना दिवस समारोह के दूसरे दिन, गुरुवार को मुजफ्फर रहमान एवं समूह द्वारा विशेष गायन प्रस्तुति दी जाएगी। इस प्रस्तुति में कुल 14 कलाकारों की संगत होगी, जो शास्त्रीय और लोक संगीत के मेल से दर्शकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करेंगे।
