जयपुर, 28 मई 2026 | सुनील शर्मा
‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत जयपुर जिला प्रशासन और जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र द्वारा एक विशेष सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) कार्यशाला का आयोजन किया गया। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधि, संसदीय एवं जयपुर जिले के प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल रहे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जल संकट के प्रति लोगों को जागरूक करना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पानी सहेजने में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करना था।
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि जल इस धरती पर हर प्राणिमात्र की सबसे मूलभूत आवश्यकता है। “जल है तो कल है और जल है तो जीवन है” का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पानी को बचाना किसी एक व्यक्ति या सरकार की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रभारी मंत्री ने जयपुर जिले को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश का अग्रणी जिला बनाने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने जिले के सभी:
- उद्यमियों और उद्योगपतियों,
- किसानों और आम नागरिकों,
- सामाजिक संगठनों और सरकारी कार्मिकों
से अपील की कि वे इस पुनीत कार्य में तन, मन और धन से अपना योगदान दें। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को पानी की बर्बादी रोकने और उसके संरक्षण की शपथ भी दिलवाई।
उद्यमियों से सीएसआर फंड के जरिए सहयोग की अपील
कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे जिला कलेक्टर संदेश नायक ने मानव जीवन और पर्यावरण के लिए पानी की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने वहां मौजूद उद्यमियों से अपील की कि वे अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का एक बड़ा हिस्सा जल संरक्षण से जुड़े कार्यों और परियोजनाओं में लगाएं।
जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र के महाप्रबंधक सुभाष शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि यह विशेष अभियान 25 मई से 5 जून 2026 तक संचालित किया जा रहा है। उन्होंने सभी औद्योगिक संगठनों से इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया। वहीं, जयपुर शहर जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक डॉक्टर अनुकृति सिंह ने उद्यमियों और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के प्रतिनिधियों को अभियान की रूपरेखा और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने दी गिरते भूजल स्तर पर चेतावनी
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने पानी के अंधाधुंध दोहन पर चिंता जताई:
- वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. मलेंद्र चौहान ने बताया कि लगातार बढ़ते भूजल दोहन से आने वाले समय में कितना बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
- जल ग्रहण विभाग के अधीक्षण अभियंता गोपाल प्रसाद जैन ने एक प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) के जरिए समझाया कि बारिश की एक-एक बूंद को सहेजना क्यों जरूरी है और रेनवाटर हार्वेस्टिंग तकनीक को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है।
पर्यावरणविदों ने साझा किए जमीनी अनुभव
इस मौके पर जल और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले देश के जाने-माने विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए। ‘पानी के जादूगर’ के नाम से मशहूर पद्म श्री लक्ष्मण सिंह लापोड़िया और ‘धरती अमृत वाले’ के नाम से विख्यात पद्म श्री सुण्डाराम ने बताया कि कैसे उन्होंने पारंपरिक तरीकों और जन-भागीदारी से बंजर होती जमीनों को दोबारा सुधारा। उन्होंने उद्यमियों और अधिकारियों को पौधारोपण और जल ग्रहण ढांचों को मजबूत करने के व्यावहारिक गुर सिखाए।
प्रशासनिक अधिकारियों की रही मौजूदगी:
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में उपवन संरक्षक वी केतन कुमार, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रथम) विनीता सिंह, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (चतुर्थ) आशीष कुमार सहित उद्योग जगत के कई बड़े नाम और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।