“जय जवान-जय किसान” के उद्घोषक शास्त्री जी की 60वीं पुण्यतिथि: विजय घाट पर उमड़ा जनसैलाब
| रिपोर्ट गणपत चौहान छत्तीसगढ़
नई दिल्ली/बिलासपुर। ‘जय जवान-जय किसान’ का अमर नारा देकर भारत को स्वावलंबन का मार्ग दिखाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की 60वीं पुण्यतिथि रविवार को सादगी और श्रद्धा के साथ मनाई गई। दिल्ली स्थित उनके समाधि स्थल विजय घाट पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शास्त्री परिवार के सदस्यों सहित देश भर से आए प्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित की।

शास्त्री परिवार और गणमान्य अतिथियों ने दी श्रद्धांजलि
प्रातः 10:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में शास्त्री परिवार के वरिष्ठ सदस्य और प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री अनिल शास्त्री, मंजू शास्त्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुनील शास्त्री, भाजपा के राष्ट्रीय सचिव व वरिष्ठ विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह, पूर्व विधायक आदर्श शास्त्री, मुदित शास्त्री और समीर शास्त्री ने समाधि पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी विजय घाट पहुंचकर पूर्व प्रधानमंत्री को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया।
छत्तीसगढ़ से पहुंचे प्रतिनिधि
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ से भी एक प्रतिनिधिमंडल श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचा। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी परिवार एवं पूर्व विधायक चन्द्र प्रकाश बाजपेयी के नेतृत्व में डॉक्टर उषा किरण बाजपेयी (अध्यक्ष नारी शक्ति), सर्वेश त्रिवेदी, कंचन त्रिवेदी, स्वर्णिका त्रिवेदी और चन्द्र सौम्य बाजपेयी ने दिल्ली पहुंचकर अपनी श्रद्धांजलि दी।
सादगी और ईमानदारी की मिसाल: शास्त्री जी के प्रेरक संस्मरण
श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने शास्त्री जी के जीवन के उन अनछुए पहलुओं को साझा किया जो आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं:
- त्याग की प्रतिमूर्ति: जब देश खाद्य संकट से जूझ रहा था, तब शास्त्री जी ने स्वयं एक वक्त का भोजन त्याग दिया और देश की जनता से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का आह्वान किया था।
- किसान प्रधानमंत्री: उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के खाली हिस्से में स्वयं हल चलाकर गेहूं की बोनी की थी। उनके द्वारा बोई गई गेहूं की वे बालियां आज भी संग्रहालय में उनकी मेहनत और सादगी के प्रतीक के रूप में सुरक्षित हैं।
एक युग का स्मरण
सहज, सरल और चरित्रवान व्यक्तित्व के धनी शास्त्री जी ने 1965 के युद्ध के दौरान देश का कुशल नेतृत्व किया था। उनकी 60वीं पुण्यतिथि पर देशभर से आए श्रद्धालुओं ने उन्हें एक सच्चे जननायक के रूप में याद किया। उपस्थित जनसमूह ने उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।