जयपुर: ‘सम्मान के साथ बुढ़ापा’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आजयपुर: ‘सम्मान के साथ बुढ़ापा’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

| लोकेंद्र सिंह शेखावत

​जयपुर, 26 फरवरी 2026 राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित विकास अध्ययन संस्थान (IDS) में “सम्मान के साथ बुढ़ापा: भारत में उभरती सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य चुनौतियाँ” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने शिरकत की।
​वरिष्ठ नागरिकों का सशक्तिकरण मुख्य प्राथमिकता
​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव आशीष मोदी ने अपने संबोधन में बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को वास्तविक सम्मान दिलाने के लिए पारिवारिक सहयोग और सामुदायिक सहभागिता की नींव मजबूत करनी होगी।
​आशीष मोदी ने चर्चा के दौरान तीन प्रमुख स्तंभों को रेखांकित किया:
​स्वास्थ्य सुरक्षा: वृद्धावस्था में सुलभ और किफायती चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार।
​आर्थिक सशक्तिकरण: सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उपाय।
​सामाजिक सम्मान: समाज और परिवार में बुजुर्गों की सक्रिय भूमिका और उनकी गरिमा की रक्षा।
​स्मृति व्याख्यान और अकादमिक विमर्श
​संगोष्ठी के दौरान चौथे प्रो. वी. एस. व्यास स्मृति व्याख्यान का भी आयोजन किया गया, जिसमें विकास के विभिन्न मॉडलों और बुजुर्गों के जीवन पर उनके प्रभाव पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. रमेश के. अरोड़ा और जेएनयू की प्रो. संघमित्रा शील आचार्य उपस्थित रहीं, जिन्होंने बदलती सामाजिक संरचना में बुजुर्गों की बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों पर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए।
​”भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्गों की आबादी के लिए हमें अब से ही एक ऐसे बुनियादी ढांचे का निर्माण करना होगा जो उनके लिए बाधा रहित और समावेशी हो।” — संगोष्ठी का मुख्य निष्कर्ष
​संगोष्ठी के प्रमुख बिंदु
​अध्यक्षता: भारतीय जराविज्ञान संघ (Gerontological Association) के अध्यक्ष प्रो. के. एल. शर्मा और आईडीएस निदेशक प्रो. संजय लोढ़ा ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की।
​तकनीकी सत्र: कुल छह तकनीकी सत्रों के माध्यम से विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य, अकेलेपन की समस्या, कानूनी अधिकार और डिजिटल साक्षरता जैसे विषयों पर गहन मंथन किया।
​प्रतिभागी: देश भर के शोधकर्ताओं, समाजशास्त्रियों और नीति विश्लेषकों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
​यह संगोष्ठी इस निष्कर्ष के साथ समाप्त हुई कि आने वाले समय में ‘सिल्वर इकॉनमी’ (बुजुर्गों पर केंद्रित अर्थव्यवस्था) और उनके अनुकूल सामाजिक नीतियों पर ध्यान देना अनिवार्य होगा ताकि भारत का प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक सम्मानजनक जीवन जी सके।योजन
​जयपुर, 26 फरवरी 2026 राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित विकास अध्ययन संस्थान (IDS) में “सम्मान के साथ बुढ़ापा: भारत में उभरती सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य चुनौतियाँ” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने शिरकत की।
​वरिष्ठ नागरिकों का सशक्तिकरण मुख्य प्राथमिकता
​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव आशीष मोदी ने अपने संबोधन में बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को वास्तविक सम्मान दिलाने के लिए पारिवारिक सहयोग और सामुदायिक सहभागिता की नींव मजबूत करनी होगी।
​आशीष मोदी ने चर्चा के दौरान तीन प्रमुख स्तंभों को रेखांकित किया:
​स्वास्थ्य सुरक्षा: वृद्धावस्था में सुलभ और किफायती चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार।
​आर्थिक सशक्तिकरण: सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उपाय।
​सामाजिक सम्मान: समाज और परिवार में बुजुर्गों की सक्रिय भूमिका और उनकी गरिमा की रक्षा।
​स्मृति व्याख्यान और अकादमिक विमर्श
​संगोष्ठी के दौरान चौथे प्रो. वी. एस. व्यास स्मृति व्याख्यान का भी आयोजन किया गया, जिसमें विकास के विभिन्न मॉडलों और बुजुर्गों के जीवन पर उनके प्रभाव पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. रमेश के. अरोड़ा और जेएनयू की प्रो. संघमित्रा शील आचार्य उपस्थित रहीं, जिन्होंने बदलती सामाजिक संरचना में बुजुर्गों की बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों पर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए।
​”भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्गों की आबादी के लिए हमें अब से ही एक ऐसे बुनियादी ढांचे का निर्माण करना होगा जो उनके लिए बाधा रहितजयपुर: ‘सम्मान के साथ बुढ़ापा’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
​जयपुर, 26 फरवरी 2026 राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित विकास अध्ययन संस्थान (IDS) में “सम्मान के साथ बुढ़ापा: भारत में उभरती सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य चुनौतियाँ” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने शिरकत की।
​वरिष्ठ नागरिकों का सशक्तिकरण मुख्य प्राथमिकता
​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव आशीष मोदी ने अपने संबोधन में बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को वास्तविक सम्मान दिलाने के लिए पारिवारिक सहयोग और सामुदायिक सहभागिता की नींव मजबूत करनी होगी।
​आशीष मोदी ने चर्चा के दौरान तीन प्रमुख स्तंभों को रेखांकित किया:
​स्वास्थ्य सुरक्षा: वृद्धावस्था में सुलभ और किफायती चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार।
​आर्थिक सशक्तिकरण: सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उपाय।
​सामाजिक सम्मान: समाज और परिवार में बुजुर्गों की सक्रिय भूमिका और उनकी गरिमा की रक्षा।
​स्मृति व्याख्यान और अकादमिक विमर्श
​संगोष्ठी के दौरान चौथे प्रो. वी. एस. व्यास स्मृति व्याख्यान का भी आयोजन किया गया, जिसमें विकास के विभिन्न मॉडलों और बुजुर्गों के जीवन पर उनके प्रभाव पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. रमेश के. अरोड़ा और जेएनयू की प्रो. संघमित्रा शील आचार्य उपस्थित रहीं, जिन्होंने बदलती सामाजिक संरचना में बुजुर्गों की बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों पर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए।
​”भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्गों की आबादी के लिए हमें अब से ही एक ऐसे बुनियादी ढांचे का निर्माण करना होगा जो उनके लिए बाधा रहित और समावेशी हो।” — संगोष्ठी का मुख्य निष्कर्ष
​संगोष्ठी के प्रमुख बिंदु
​अध्यक्षता: भारतीय जराविज्ञान संघ (Gerontological Association) के अध्यक्ष प्रो. के. एल. शर्मा और आईडीएस निदेशक प्रो. संजय लोढ़ा ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की।
​तकनीकी सत्र: कुल छह तकनीकी सत्रों के माध्यम से विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य, अकेलेपन की समस्या, कानूनी अधिकार और डिजिटल साक्षरता जैसे विषयों पर गहन मंथन किया।
​प्रतिभागी: देश भर के शोधकर्ताओं, समाजशास्त्रियों और नीति विश्लेषकों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
​यह संगोष्ठी इस निष्कर्ष के साथ समाप्त हुई कि आने वाले समय में ‘सिल्वर इकॉनमी’ (बुजुर्गों पर केंद्रित अर्थव्यवस्था) और उनके अनुकूल सामाजिक नीतियों पर ध्यान देना अनिवार्य होगा ताकि भारत का प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक सम्मानजनक जीवन जी सके। और समावेशी हो।” — संगोष्ठी का मुख्य निष्कर्ष
​संगोष्ठी के प्रमुख बिंदु
​अध्यक्षता: भारतीय जराविज्ञान संघ (Gerontological Association) के अध्यक्ष प्रो. के. एल. शर्मा और आईडीएस निदेशक प्रो. संजय लोढ़ा ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की।
​तकनीकी सत्र: कुल छह तकनीकी सत्रों के माध्यम से विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य, अकेलेपन की समस्या, कानूनी अधिकार और डिजिटल साक्षरता जैसे विषयों पर गहन मंथन किया।
​प्रतिभागी: देश भर के शोधकर्ताओं, समाजशास्त्रियों और नीति विश्लेषकों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
​यह संगोष्ठी इस निष्कर्ष के साथ समाप्त हुई कि आने वाले समय में ‘सिल्वर इकॉनमी’ (बुजुर्गों पर केंद्रित अर्थव्यवस्था) और उनके अनुकूल सामाजिक नीतियों पर ध्यान देना अनिवार्य होगा ताकि भारत का प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक सम्मानजनक जीवन जी सके।

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