जयपुर: राजस्व न्यायालयों में अब ‘नेचुरल जस्टिस’ से होगा न्याय, पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए लगी विशेष क्लास

जयपुर: राजस्व न्यायालयों में अब ‘नेचुरल जस्टिस’ से होगा न्याय, पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए लगी विशेष क्लास

|  गौरव कोचर

जयपुर, 17 फरवरी। जयपुर जिला प्रशासन द्वारा राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला में जिले के उपखण्ड अधिकारियों और रीडर्स को राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध व विधिसम्मत निस्तारण का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

​सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: जिला कलक्टर

​कार्यशाला का शुभारंभ जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि:

  • ​प्रत्येक राजस्व मामले में प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों का पूर्ण पालन हो।
  • ​राजस्व न्याय प्रणाली में आमजन का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता अनिवार्य है।
  • ​लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा की जाए और अनावश्यक स्थगन (Adjournment) देने से बचा जाए।
  • ​तय समय-सीमा के भीतर वादों का निस्तारण कर सुशासन सुनिश्चित किया जाए।

​राधेश्याम बत्रा ने सिखाए आदेश लेखन के गुर

​कार्यशाला के मुख्य वक्ता, सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी राधेश्याम बत्रा ने राजस्व अधिकारियों को विधिक बारीकियों से रूबरू करवाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजस्व न्यायालय भूमि विवादों के समाधान का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं, इसलिए इनके आदेशों की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:

  1. प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत: बत्रा ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता” और यही न्याय का मूल आधार है।
  2. गुणवत्तापूर्ण आदेश लेखन: आदेश हमेशा स्पष्ट, कारणयुक्त (Speaking Orders) और विधिसम्मत होने चाहिए ताकि वे अपीलीय स्तर पर भी कानूनी रूप से मजबूत रहें।
  3. विधिक प्रावधानों का विश्लेषण: राजस्थान टीनेन्सी एक्ट, राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम और सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर व्यावहारिक चर्चा की गई।

​डिजिटल मॉनिटरिंग और प्रशासनिक सुधार

​कार्यशाला में न केवल न्यायिक बल्कि प्रशासनिक सुधारों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को अभिलेख संधारण (Record Maintenance), सटीक नोटशीट लेखन, समन और नोटिस की तामील की विधिवत प्रक्रिया और प्रकरणों की डिजिटल मॉनिटरिंग के बारे में विस्तार से बताया गया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों की शंकाओं और व्यावहारिक समस्याओं का विशेषज्ञ द्वारा मौके पर ही समाधान किया गया।

​उपस्थित अधिकारी

​इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रथम विनीता सिंह, अतिरिक्त जिला कलक्टर द्वितीय मेघराज मीणा, अतिरिक्त जिला कलक्टर जयपुर दक्षिण युगांतर शर्मा सहित जिले के समस्त उपखण्ड अधिकारी (SDM) और उनके रीडर उपस्थित रहे।

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