मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी को दूर करेगी नई नीति, डॉक्टरों को मिलेगा बड़ा अवसर
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 07,2025
जयपुर, 7 जुलाई 2025 — राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भारी किल्लत को देखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मेडिकल एजुकेशन सेक्टर में नियुक्तियों को आसान बनाने और रिक्त पदों को भरने के लिए केंद्र सरकार की नई अधिसूचना पर राज्य सरकार ने अमल शुरू कर दिया है। इसके तहत अब सरकारी अस्पतालों में कार्यरत अनुभवी चिकित्सकों को मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा।
10 साल अनुभव वाले डॉक्टर बन सकेंगे एसोसिएट प्रोफेसर
राज्य सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में कार्यरत वे डॉक्टर, जिन्हें 10 वर्षों का अनुभव है, उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा। वहीं, जिन चिकित्सकों के पास 2 वर्षों का अनुभव है, उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर बनाया जा सकता है। इससे मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय से रिक्त चल रहे पदों को भरने की दिशा में बड़ी राहत मिलेगी।
NMC की अधिसूचना पर चल रहा अध्ययन
चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि “राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) की अधिसूचना का गहन अध्ययन किया जा रहा है। इसके तहत मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की शिथिलताओं को दूर करने के लिए जो प्रावधान किए गए हैं, वे वर्तमान हालात में बेहद उपयोगी साबित होंगे।”
प्रदेश में 40 से 50% तक पद खाली
फिलहाल राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी के लगभग 40 से 50 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इससे न केवल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, बल्कि मेडिकल शिक्षा के स्तर को भी नुकसान पहुंच रहा था। अब नए नियमों के तहत इन पदों को जल्दी भरा जा सकेगा।
डीएनबी सिखा चुके कंसल्टेंट बन सकेंगे प्रोफेसर
नए नियमों के तहत जो वरिष्ठ कंसल्टेंट चिकित्सक तीन वर्षों तक डीएनबी (DNB) कोर्स पढ़ा चुके हैं, उन्हें सीधे प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया जा सकेगा। अब तक राज्य में केवल असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर ही नियमित भर्तियां हो रही थीं, जबकि एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के सैकड़ों पद खाली पड़े थे।
सरकार को मिलेगी दोहरी सफलता
इस नीति से एक ओर मेडिकल कॉलेजों को योग्य फैकल्टी मिलेगी, वहीं दूसरी ओर वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी डॉक्टरों को उच्च शिक्षा क्षेत्र में योगदान देने का अवसर मिलेगा। इससे राज्य की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन भी प्राप्त होगा।
राज्य सरकार का यह निर्णय मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि नियमानुसार प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाती है, तो अगले शैक्षणिक सत्र से पहले ही फैकल्टी की भारी कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।