जयपुर में 78वें सेना दिवस पर भारतीय सेना का भव्य शौर्य प्रदर्शन: राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने जवानों का बढ़ाया उत्साह
जयपुर | 15 जनवरी, 2026
| गणेश शर्मा
राजस्थान की राजधानी जयपुर आज भारतीय सेना के अदम्य साहस और पराक्रम की साक्षी बनी। जगतपुरा के महल रोड पर आयोजित 78वें सेना दिवस परेड के दौरान भारतीय सेना ने अपने शौर्य का ऐसा प्रदर्शन किया कि हर नागरिक का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। इस भव्य समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।



ऐतिहासिक परेड और आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन
महल रोड पर आयोजित 3 किलोमीटर लंबी इस विशेष परेड में सेना की 7 विभिन्न रेजिमेंटों की टुकड़ियों ने हिस्सा लिया। परेड के दौरान भारतीय सेना ने न केवल अपने अनुशासन का परिचय दिया, बल्कि अत्याधुनिक हथियारों और सैन्य साजो-सामान का प्रदर्शन कर देश की बढ़ती सैन्य शक्ति की झलक भी दिखाई। आसमान में गरजते विमानों और जमीन पर सेना के हैरतअंगेज करतबों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
’ऑपरेशन सिंदूर’ के पराक्रम की गूँज
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने दुश्मन देश के विरुद्ध की गई इस सैन्य कार्यवाही की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सेना की वीरता और रणनीतिक कौशल ने विश्व स्तर पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि:
”भारतीय सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक है और इसकी अदम्य साहस, शौर्य तथा बलिदान की परंपरा पर हर भारतीय को गर्व है।”
जवानों और वीरांगनाओं का सम्मान
राज्यपाल ने इस अवसर पर सेवारत सैनिकों, अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और उनके परिजनों को आर्मी डे की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सैनिकों का त्याग ही राष्ट्र की सुरक्षा की नींव है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी जवानों की हौसला अफजाई की और सेना के साथ राज्य सरकार के अटूट सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:
- स्थान: महल रोड, जगतपुरा (जयपुर)।
- सहभागिता: 7 रेजिमेंटों की टुकड़ियों द्वारा शौर्य प्रदर्शन।
- मुख्य अतिथि: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा।
- विशेष आकर्षण: अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का गौरवगान।
भारतीय सेना का यह शौर्य प्रदर्शन न केवल शक्ति का प्रदर्शन था, बल्कि देश के प्रति उनके अटूट समर्पण का भी प्रतीक था।

