जयपुर में 78वां सेना दिवस: शौर्य और आधुनिकता का भव्य संगम

जयपुर में 78वां सेना दिवस: शौर्य और आधुनिकता का भव्य संगम

| नरेश गुनानी

जयपुर, 11 जनवरी 2026। राजस्थान की वीर धरा पहली बार भारतीय सेना दिवस के गौरवमयी उत्सव की साक्षी बनी। 15 जनवरी को मनाए जाने वाले 78वें सेना दिवस के उपलक्ष्य में जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में ‘शौर्य संध्या’ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन था, बल्कि 1947 से लेकर हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक भारतीय सेना के अदम्य साहस की एक जीवंत गाथा भी रहा।

फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स

​पहली बार सैन्य छावनी से बाहर आयोजन

​यह आयोजन सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर, सेना को आमजन से जोड़ने के उद्देश्य से 2023 से सेना दिवस दिल्ली से बाहर आयोजित किया जा रहा है। बेंगलुरु, लखनऊ और पुणे के बाद 2026 में जयपुर को यह गौरव मिला। विशेष बात यह है कि देश में पहली बार यह आयोजन सैन्य छावनी (कैंट) क्षेत्र से बाहर पब्लिक स्टेडियम में किया गया, ताकि अधिक से अधिक नागरिक इसका हिस्सा बन सकें।

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​1,000 स्वदेशी ड्रोन्स ने रचा आकाश में इतिहास

​कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्वदेशी ड्रोन शो रहा। एक साथ 1,000 ड्रोन्स ने जयपुर के आसमान को सैन्य नवाचार और भारतीय संस्कृति की आकृतियों से सराबोर कर दिया।

  • सांस्कृतिक प्रतीक: आकाश में भगवान कृष्ण का रथ, अर्जुन, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज की आकृतियां उभरीं।
  • सैन्य गौरव: ड्रोन्स के माध्यम से तिरंगा, सेना के प्रतीक चिन्ह और ‘भैरव बटालियन’ को दर्शाया गया।
  • विकसित भारत: यह प्रदर्शन ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत-2047’ की संकल्पना का प्रतीक बना।

​1947 से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक की गाथा

​एक विशेष नाट्य प्रस्तुति और लघु फिल्म के जरिए भारतीय सेना के सफर को जीवंत किया गया। इसमें निम्नलिखित प्रमुख पड़ावों को दर्शाया गया:

  1. ऐतिहासिक युद्ध: 1947 का कश्मीर हमला, 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध एवं कारगिल विजय।
  2. आतंकवाद पर प्रहार: पुलवामा हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति।
  3. ऑपरेशन सिंदूर: हालिया सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘ऑपरेशन सुदर्शन चक्र’ की सफलता को प्रमुखता से दिखाया गया, जिसमें मात्र 88 घंटों में दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया गया था।

​परंपरा और पराक्रम का मेल

​मैदान पर भारतीय सेना के जांबाजों ने अपनी शारीरिक दक्षता और युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया:

  • शत्रुजीत ब्रिगेड: पैरा मोटर्स द्वारा रोमांचक हवाई करतब दिखाए गए।
  • पारंपरिक कलाएं: मलखंभ और कलारिपयट्टू जैसे प्राचीन भारतीय मार्शल आर्ट्स का प्रदर्शन किया गया।
  • संबोधन: दक्षिण पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने राजस्थान के वीरों (पीरु सिंह, शैतान सिंह) को नमन करते हुए कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण सेना की ताकत बन रहा है।

​क्यों मनाया जाता है सेना दिवस?

​15 जनवरी का दिन भारतीय सेना के लिए ऐतिहासिक है। इसी दिन 1949 में फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा ने ब्रिटिश कमांडर से भारतीय थल सेना के प्रथम अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। यह दिवस सेना के अनुशासन, एकता और संप्रभुता की रक्षा के संकल्प को समर्पित है।

उपस्थिति: कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी नवीन जैन, नीरज के. पवन, जयपुर जिला कलेक्टर डॉ. जितेन्द्र सोनी सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारी, एनसीसी कैडेट्स और हजारों की संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

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