जयपुर में 1500 से अधिक राहें हुईं आसान: ‘रास्ता खोलो अभियान’ बना ग्रामीणों के लिए वरदान
| नरेश गुनानी
जयपुर, 11 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों की पालना में जयपुर जिला प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा ‘रास्ता खोलो अभियान’ ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और सुगमता की नई इबारत लिख रहा है। प्रशासन की संवेदनशीलता और आपसी समझाइश का ही परिणाम है कि महज 14 महीनों से भी कम समय में जिले के 1,508 अवरुद्ध रास्ते खुलवाए जा चुके हैं। वर्षों से बंद पड़े इन रास्तों के खुलने से लाखों ग्रामीणों और किसानों का अपनी ढाणियों और खेतों तक पहुंचना अब सुगम हो गया है।

फागी तहसील सबसे आगे, मौजमाबाद दूसरे स्थान पर
अभियान के तहत अब तक हुई प्रगति में फागी तहसील ने बाजी मारी है, जहाँ प्रशासन ने सर्वाधिक 136 रास्ते खुलवाने में सफलता प्राप्त की है। इसके बाद मौजमाबाद तहसील का स्थान रहा, जहाँ 120 रास्तों के विवाद सुलझाकर उन्हें आमजन के लिए खोला गया। अन्य प्रमुख तहसीलों का विवरण इस प्रकार है:
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तहसील |
खुले रास्तों की संख्या |
तहसील |
खुले रास्तों की संख्या |
|---|---|---|---|
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आंधी |
101 |
चाकसू |
82 |
|
चौमूं |
91 |
फुलेरा |
81 |
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शाहपुरा |
86 |
आमेर / जमवारामगढ़ |
80-80 |
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दूदू |
78 |
बस्सी |
77 |
|
माधोराजपुरा |
76 |
जोबनेर |
74 |
इसके अतिरिक्त रामपुरा–डाबड़ी, किशनगढ़–रेनवाल, कोटखावदा, जालसू, तूंगा, सांगानेर, कालवाड़ और जयपुर तहसील में भी दर्जनों रास्तों को अतिक्रमण मुक्त करवाया गया है।
जिला कलक्टर की सीधी मॉनिटरिंग और साप्ताहिक लक्ष्य
जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी स्वयं इस अभियान की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने प्रत्येक तहसील के लिए हर सप्ताह न्यूनतम 3 रास्ते खुलवाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अधिकांश मामलों का निस्तारण कानूनी पेचीदगियों के बजाय सहमति और समझाइश के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे आपसी सौहार्द भी बना हुआ है।
सिर्फ रास्ता ही नहीं, अब बन रही हैं सड़कें
अतिरिक्त जिला कलक्टर एवं अभियान के नोडल अधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि रास्ता खुलने के बाद ग्रामीणों को कीचड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से निजात दिलाने के लिए वहां सड़क निर्माण के निर्देश भी दिए गए हैं।
- अब तक 300 किलोमीटर से अधिक ग्रेवल रोड का निर्माण हो चुका है।
- 20 किलोमीटर से अधिक सीसी (कंक्रीट) रोड का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है।
- न्यायालय में लंबित प्रकरणों के समाधान के लिए भी संबंधित पक्षों को उचित मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
जनविश्वास का मॉडल बना अभियान
ग्रामीण क्षेत्रों में रास्तों पर अतिक्रमण एक बड़ी समस्या रही है, जिसके कारण जनसुनवाई और न्यायालयों में हजारों मामले लंबित रहते थे। इससे न केवल धन और समय की हानि होती थी, बल्कि कई बार कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ती थी। प्रशासन के इस अभियान ने इन समस्याओं का स्थायी समाधान पेश किया है, जो अब राजस्थान में प्रशासनिक कार्यकुशलता और संवेदनशीलता का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।

