जयपुर/ गौरव कोचर/राजधानी जयपुर में चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त रोकने तथा आपराधिक व असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस आयुक्तालय ने सख्त कदम उठाया है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) प्रदीप मोहन शर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस)-2023 की धारा 163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जयपुर कमिश्नरेट क्षेत्र के सभी सेकेंड हैंड वाहन डीलरों, एजेंटों और कबाड़ियों के लिए विस्तृत व अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश 30 सितम्बर 2026 से 28 नवम्बर 2026 तक प्रभावशील रहेगा।
पुलिस प्रशासन के अनुसार, शहर में बड़े पैमाने पर दोपहिया एवं चौपहिया पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री की जा रही है। प्रायः यह देखा गया है कि डीलर या एजेंट परिवहन विभाग को सूचित किए बिना और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 50 की औपचारिकताओं (विशेषकर फार्म 29 व 30 की पूर्ति) को पूरा किए बिना ही वाहनों का लेन-देन कर देते हैं। बिना रिकॉर्ड बेचे गए इन वाहनों का उपयोग लूट, डकैती और अन्य गंभीर अपराधों सहित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में किए जाने की आशंका बनी रहती है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों की शिनाख्त करना जटिल हो जाता है।
डीलरों, एजेंटों और कबाड़ियों के लिए अनिवार्य नियम:
- लेन-देन रजिस्टर और फोटो संधारण: मोटर साइकिल, स्कूटर, कार सहित किसी भी प्रकार के पुराने वाहन का व्यापार करने वाले सभी डीलर और कबाड़ी एक रजिस्टर संधारित करेंगे। इसमें प्रत्येक खरीद-बिक्री का ब्योरा दर्ज होगा तथा विक्रेता व क्रेता दोनों के नवीनतम फोटो चस्पा करने होंगे।
- दस्तावेजों की पूर्ति व सत्यापन: फार्म 29, 30 और डिलीवरी लेटर तारीख के स्पष्ट उल्लेख के साथ विधिवत भरे होने चाहिए। वाहन बेचने वाले व्यक्ति के मालिकाना हक का मिलान वाहन की मूल आरसी (पंजीकरण प्रमाण पत्र) और उसके वैध पहचान पत्र से किया जाना अनिवार्य होगा।
- पहचान पत्रों का रिकॉर्ड: लेन-देन के दौरान पहचान संबंधी आवश्यक दस्तावेज (जैसे पहचान पत्र, राशन कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि) एवं फार्मों की प्रतियां सुरक्षित रखनी होंगी, ताकि पुलिस द्वारा मांगे जाने पर तत्काल उपलब्ध कराई जा सकें। संदिग्ध क्रेता या विक्रेता प्रतीत होने पर तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को सूचना देनी होगी।
- हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य: वाहन रखने के परिसर में अच्छी गुणवत्ता, पर्याप्त स्टोरेज और प्लेबैक सुविधा युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे। कैमरों का एंगल इस प्रकार रखना होगा कि परिसर के अंदर और बाहर आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति (क्रेता-विक्रेता) और वाहनों की स्पष्ट पहचान हो सके।
उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई:
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन नियमों की अवहेलना करने वाले किसी भी डीलर, एजेंट अथवा कबाड़ी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत वैधानिक व दंडात्मक अभियोग चलाया जाएगा। यह आदेश लोक-व्यवस्था बनाए रखने और अपराधों की रोकथाम के उद्देश्य से एकपक्षीय रूप से तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।