जयपुर, 22 जुलाई/सुनील शर्मा/ राजधानी जयपुर के पारदेश्वर महादेव मंदिर परिसर में बुधवार को ‘समरसता महामहोत्सव’ का भव्य और गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। अनंत श्री विभूषित श्रीमद् जगतगुरु स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती के पावन सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने एक सशक्त, समरस और विकसित भारत के निर्माण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग से समान भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
सामाजिक समरसता ही सनातन संस्कृति का आधार
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा “अनेकता में एकता” और सामाजिक सद्भाव में समाहित है। जब तक आम नागरिक जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र जैसी संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर सेवा, सहयोग और सद्भाव के विचार से नहीं जुड़ता, तब तक एक वास्तविक समरस समाज की कल्पना संभव नहीं है।
इतिहास का उदाहरण देते हुए उन्होंने यदुनाथ सरकार की सुप्रसिद्ध पुस्तक “शिवाजी एंड हिज टाइम” के एक प्रसंग का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया:
”मुगलों ने प्रयाग में स्थित ऐतिहासिक अक्षय वट वृक्ष को काटकर उस पर एक भारी-भरकम तवा रख दिया था, ताकि वह वृक्ष पूरी तरह नष्ट हो जाए। लेकिन सनातन शक्ति की जीवंतता देखिए—कुछ ही समय बाद उस कटे हुए वृक्ष से पुनः नई कोंपले फूट आईं। जिस तरह उस अक्षय वट को समाप्त नहीं किया जा सका, ठीक उसी तरह भारतीय समाज की समरस सनातन शक्ति भी हर दौर में अराजक शक्तियों का मुकाबला करते हुए स्वयं को कायम रखती आई है।”
’एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ और ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश
राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना का मूल उद्देश्य भी यही है कि हम धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटने वाली विघटनकारी ताकतों को समूल नष्ट करें। समरसता महामहोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से ही नागरिक जीवन के आलोक पथ से जुड़ सकते हैं।
उन्होंने भारतीय सनातन संस्कृति को मानवीय मूल्यों और ’वसुधैव कुटुम्बकम’ (संपूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है) का संदेश देने वाली संस्कृति बताते हुए सभी से ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) की सोच के साथ काम करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
पारदेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना
कार्यक्रम के आरंभ में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पारदेश्वर महादेव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेश तथा देशवासियों के लिए सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना की। इसके पश्चात उन्होंने श्रीमद् जगतगुरु स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, प्रबुद्धजन और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय सनातन’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा।