जयपुर में सजेगी कविताओं की महफिल: ‘सम्मुख’ में जुटेंगे देशभर के नामचीन साहित्यकार
| योगेश शर्मा
जयपुर। गुलाबी नगरी के साहित्य प्रेमियों के लिए रविवार, 4 जनवरी का दिन बेहद खास होने जा रहा है। गीत, गजल और विमर्श के प्रतिष्ठित मंच ‘सम्मुख’ के तहत जयपुर के कांस्टीट्यूशन क्लब में कविता पाठ का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम राजस्थान फोरम के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
देश के विभिन्न कोनों से आएंगी कवयित्रियाँ
ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन के प्रमोद शर्मा ने बताया कि इस काव्य गोष्ठी में हिस्सा लेने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से तीन प्रख्यात रचनाकार जयपुर पहुँच रही हैं:
- संगीता गुंदेचा (भोपाल): प्रखर कथाकार, कवयित्री और अनुवादक।
- बाबुषा कोहली (जबलपुर): अपनी विशिष्ट काव्य शैली के लिए चर्चित कवयित्री।
- श्वेता मिश्रा (शिमला): लेखिका, मोटिवेशनल स्पीकर एवं सोशल एक्टिविस्ट।
पुस्तक विमोचन का भी होगा साक्षी
काव्य पाठ के साथ-साथ यह शाम दो महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों के विमोचन की भी गवाह बनेगी:
- सत्य मधुमक्खी का छत्ता है: बाबुषा कोहली का हाल ही में प्रकाशित कविता संग्रह।
- मालवा डायरी: बहुआयामी साहित्यकार किशन प्रणय द्वारा लिखित उपन्यास।
रचनाकारों का परिचय
किशन प्रणय:
कोटा के रहने वाले किशन प्रणय समकालीन हिन्दी, राजस्थानी और मालवी साहित्य के उभरते हुए हस्ताक्षर हैं। वे अपनी बहुभाषिक रचनात्मकता के लिए जाने जाते हैं। उनके अब तक हिंदी में 4 काव्य संग्रह, राजस्थानी में 3 काव्य और 1 व्यंग्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनके नए उपन्यास ‘मालवा डायरी’ में वहां के भूगोल के साथ-साथ लोक-जीवन का भी जीवंत चित्रण किया गया है।
बाबुषा कोहली:
बाबुषा कोहली का साहित्य जगत में गहरा प्रभाव है। उनका पहला संग्रह ‘प्रेम गिलहरी’ (2014) भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित और पुरस्कृत हो चुका है। इसके अलावा ‘बावन चिट्ठियाँ’ (वागीश्वरी पुरस्कार से सम्मानित) और हाल ही में ‘लौ’ (2025) के लिए उन्हें ‘शब्द शिल्पी पुरस्कार’ से नवाजा गया है।
श्वेता मिश्रा:
हिमाचल प्रदेश की श्वेता मिश्रा साहित्य लेखन के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं। वे वर्तमान में केनरा बैंक, शिमला में वरिष्ठ शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं और एक मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में भी पहचानी जाती हैं।
संगीता गुन्देचा:
बहुमुखी प्रतिभा की धनी संगीता गुन्देचा की ‘पडिक्कमा’ और ‘एकान्त का मानचित्र’ जैसी पुस्तकें चर्चित रही हैं। उन्होंने संस्कृत, प्राकृत और जापानी कविताओं का हिंदी अनुवाद कर साहित्य को समृद्ध किया है। साथ ही उन्होंने नाट्य दर्शन और रंगकर्म के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण संवादपरक पुस्तकें लिखी हैं।