संत समाज और गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में पिंजरापोल गौशाला में गूंजा गौ-संरक्षण का संदेश
जयपुर/ लोकेंद्र सिंह शेखावत
भारतीय संस्कृति में गौ-माता और गौ-धन के धार्मिक, वैज्ञानिक व सामाजिक महत्त्व को जन-जन तक पहुँचाने तथा गौ-सेवा के प्रति सामाजिक चेतना जागृत करने के उद्देश्य से राजधानी जयपुर में ‘राष्ट्रीय गौ धन-सेवा सम्मान समारोह-2026’ गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। ज्योति मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट (जयपुर) के तत्वावधान तथा ‘आपकी लाडली गौशाला’ के संयुक्त सहयोग से यह भव्य कार्यक्रम सुरभि सदन, पिंजरापोल गौशाला परिसर में संपन्न हुआ।
समारोह के दौरान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त भविष्यवक्ता पंडित डॉ. रविंद्र आचार्य को उनके निरंतर गौ-सेवा कार्यों, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और विशिष्ट सामाजिक योगदान के लिए ‘राष्ट्रीय गौ धन-सेवा सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। मंच पर उपस्थित संतों एवं विशिष्ट अतिथियों ने उन्हें शॉल, स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
संतों और धर्माचार्यों का मिला सानिध्य
कार्यक्रम में संत समाज, प्रबुद्ध धर्माचार्यों, समाजसेवियों तथा जनप्रतिनिधियों का व्यापक जमावड़ा देखने को मिला। समारोह के मुख्य अतिथि श्री श्री 1008 संत श्री जगद्गुरु दिवाकराचार्य अवधेशाचार्य जी महाराज एवं महंत श्री प्रेमपुरी नेपाली बाबा रहे।
कार्यक्रम में पूर्व न्यायाधीश व जिला उपभोक्ता विवाद आयोग (जयपुर-तृतीय) के अध्यक्ष देवेंद्र मोहन माथुर तथा तारा ज्योतिष साधना केंद्र के कोषाध्यक्ष पंडित योगेंद्र शर्मा बतौर विशिष्ट अतिथि मंचस्थ रहे। इसके अलावा गौ-संरक्षण और सेवा कार्यों से जुड़े शहर के अनेक गणमान्य लोग भी इस अवसर पर मौजूद थे।
गौ-संरक्षण केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन का आधार: वक्ता
समारोह को संबोधित करते हुए संत श्री दिवाकराचार्य अवधेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि गौ-माता भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सनातन परंपरा में गौ-सेवा को सर्वोपरि धर्म माना गया है। आज के आधुनिक दौर में पर्यावरण संतुलन, जैविक कृषि और मानव स्वास्थ्य के लिए देशी गौ-वंश का संरक्षण अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।
विशिष्ट अतिथि देवेंद्र मोहन माथुर ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में गौ-सेवा का दायित्व केवल कुछ संस्थाओं या संतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर नागरिक को अपने सामर्थ्य अनुसार इसमें भागीदारी निभानी चाहिए। ऐसे आयोजनों से समाज को सही दिशा और प्रेरणा मिलती है।
नई पीढ़ी को संस्कार और सेवा से जोड़ना मुख्य उद्देश्य
आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस समारोह का प्राथमिक लक्ष्य समाज में उपेक्षित हो रहे गौ-वंश के संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को पुनर्जीवित करना है। ट्रस्ट का प्रयास है कि युवा पीढ़ी को गौ-आधारित जीवनशैली, पंचगव्य के महत्त्व और गौ-सेवा के आध्यात्मिक व वैज्ञानिक लाभों से अवगत कराया जाए।
सम्मान ग्रहण करने के उपरांत डॉ. रविंद्र आचार्य ने आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गौ-माता की सेवा से बढ़कर कोई साधना नहीं है। यह सम्मान उन्हें भविष्य में और अधिक निष्ठा के साथ गौ-सेवा व सामाजिक कार्यों में समर्पित रहने की प्रेरणा देगा।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने पिंजरापोल गौशाला परिसर का अवलोकन किया और गौ-पूजन कर उनके संवर्धन का संकल्प दोहराया। आयोजकों ने सभी आगंतुकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त कर कार्यक्रम का समापन किया।