जयपुर में राज्य स्तरीय वन मेले का भव्य आगाज: आदिवासियों के हुनर और वन उत्पादों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार
| नरेश गुनानी
जयपुर, 09 फरवरी 2026 | वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री संजय शर्मा ने सोमवार को जयपुर की सचिवालय नर्सरी में दो दिवसीय (9 एवं 10 फरवरी) राज्य स्तरीय वन मेले का उद्घाटन किया। यह मेला न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है, बल्कि वनों पर निर्भर आदिवासी समुदायों की आर्थिक उन्नति के लिए एक बड़े मंच के रूप में उभरा है।
मुख्यमंत्री की मंशा: संरक्षण के साथ संबल
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशानुरूप यह आयोजन वन और वन्य जीवों के संरक्षण के साथ-साथ आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मेले के माध्यम से वनों से प्राप्त औषधियों और वन्य उत्पादों को सीधा बाजार मिलेगा, जिससे ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को आर्थिक संबल प्राप्त होगा।
भविष्य की योजना: जिला स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक विस्तार
वन मंत्री ने वन विभाग की आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि:
- उदयपुर और कोटा की तर्ज पर अब सभी संभागों और जिलों में भी वन मेलों का आयोजन होगा।
- आने वाले समय में जयपुर में एक राष्ट्रीय स्तरीय वन मेले का आयोजन किया जाएगा।
- कार्यक्रम के दौरान RFBDP परियोजना के तहत स्वयं सहायता समूहों के लिए ‘आजीविका संवर्धन मार्गदर्शिका’ का विमोचन भी किया गया।
मेले के मुख्य आकर्षण: 52 स्टॉल्स पर सजी वन संपदा
इस मेले में उदयपुर, बांसवाड़ा, चुरू, बीकानेर और कोटा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्वयं सहायता समूहों और गैर-सरकारी संगठनों ने भाग लिया है। मेले में प्रदर्शित प्रमुख उत्पाद इस प्रकार हैं:
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उत्पाद श्रेणी |
प्रमुख आकर्षण |
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खाद्य एवं पेय |
शहद, जामुन उत्पाद, मिलेट आधारित बिस्कुट, लड्डू, कैर-सांगरी, मसाले और अचार। |
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हर्बल एवं सौंदर्य |
एलोवेरा उत्पाद, हर्बल साबुन, फेस पैक, हेयर ऑयल और जड़ी-बूटियाँ। |
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हस्तशिल्प |
बांस के तीर-कमान, लकड़ी की कावड़ कला, लाख का काम और मंडाना जनजातीय कला। |
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अन्य |
औषधीय पौधे, जैव उर्वरक, गौ-काष्ठ और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी कलात्मक सामग्री। |
विशेषज्ञों के साथ संवाद और जागरूकता
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख पवन कुमार उपाध्याय ने स्वागत भाषण में मेले के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। मेले के दौरान विशेषज्ञों द्वारा टॉक शो और संवाद सत्रों का भी आयोजन किया जा रहा है, जहाँ प्रकृति प्रेमियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वन संसाधनों के संरक्षण और उनसे जुड़ी आजीविका के बारे में तकनीकी जानकारी दी जा रही है।
गरिमामय उपस्थिति
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन एवं पर्यावरण) आनन्द कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनुराग भारद्वाज, और शिखा मेहरा सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य वन संरक्षक (जयपुर) रामकरण खेरवा ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
