जयपुर, 13 जुलाई 2026/ नरेश गुनानी/राजस्थान के संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीवों के संरक्षण, पर्यावरण प्रबंधन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार को सचिवालय में राजस्थान संरक्षित क्षेत्र संरक्षण समिति (RPACS) की सामान्य सभा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य के वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए, साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹144.43 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना और बजट को मंजूरी दी गई।
इन प्रमुख कार्यों पर खर्च होगी राशि
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैठक के निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि स्वीकृत बजट का इस्तेमाल वन्यजीवों के अनुकूल माहौल तैयार करने और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए किया जाएगा। इस राशि को मुख्य रूप से निम्नलिखित गतिविधियों पर खर्च किया जाएगा:
- आवास सुधार और घासभूमि विकास: वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को बेहतर बनाना और शाकाहारी जीवों के लिए घास के मैदानों का विकास करना।
- जल स्रोत विकास: जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों के भीतर पानी के नए स्रोत विकसित करना ताकि वन्यजीवों को सालभर पेयजल मिल सके।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण: रिहायशी इलाकों और जंगलों के बीच टकराव की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना।
- ग्राम पुनर्वास: संरक्षित क्षेत्रों के भीतर आने वाले गांवों का स्वैच्छिक और सुचारू पुनर्वास करना।
- अन्य महत्वपूर्ण कार्य: वन्यजीव संरक्षण, अनुसंधान (रिसर्च), आधुनिक निगरानी प्रणाली और संरक्षण से जुड़ी बुनियादी अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करना।
पिछले वर्ष की प्रगति पर संतोष, ऑडिट रिपोर्ट को मंजूरी
सामान्य सभा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक कार्ययोजना की प्रगति की भी बारीकी से समीक्षा की। पिछले वर्ष के दौरान विभिन्न संरक्षण कार्यों पर ₹62.42 करोड़ का खर्च किया गया, जिस पर समिति ने संतोष व्यक्त किया। इसके साथ ही बैठक में कार्यकारी समिति की सिफारिशों, वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंकेक्षित लेखों (Audited Accounts) और ऑडिट रिपोर्ट को भी सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई।
रैप्टर संरक्षण और शिकार आधार संवर्धन पर विशेष ध्यान
इस बार की बैठक में पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए कुछ विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत रैप्टर (शिकारी पक्षियों जैसे बाज, चील आदि) के संरक्षण, संरक्षित क्षेत्रों में शिकार आधार संवर्धन (Prey Base Enhancement) और स्वैच्छिक ग्राम पुनर्वास के लिए अतिरिक्त बजटीय प्रावधानों को मंजूरी दी गई है।
राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का होगा आयोजन
समिति की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों तथा वन्यजीव मामलों के विषय विशेषज्ञों को RPACS से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, वन्यजीव संरक्षण की आधुनिक तकनीकों और रणनीतियों पर मंथन करने के लिए वर्ष 2026 में एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला (National Workshop) भी आयोजित की जाएगी।
इस बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित समिति के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे, जिन्होंने राज्य में पर्यावरण और वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने का संकल्प दोहराया।