जयपुर | 30 जुलाई 2026/ गौरव कोचर/राजस्थान वाणिज्यिक कर विभाग ने राज्य में फर्जी बिलों के जरिए कर चोरी करने वालों पर नकेल कसते हुए एक बड़े फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मामले का खुलासा किया है। विभाग की एनफोर्समेंट विंग-III (सर्किल-ए) की टीम ने मानसरोवर विस्तार स्थित केसर नगर में संचालित फर्म मैसर्स नव्यता पर अचानक सर्वे कार्रवाई की।
विभाग को अपने आधुनिक ‘डेटा एनालिटिक्स एवं रिस्क एनालिसिस सिस्टम’ से मिली सटीक सूचनाओं के आधार पर यह सफलता मिली है।
कार्रवाई का पूरा विवरण और धांधली का तरीका
जांच में सामने आया कि मैसर्स नव्यता मुख्य रूप से मैनपावर सप्लाई, स्टाफिंग और ट्रेनिंग सर्विस प्रदान करने का काम करती है। फर्म ने जीएसटी नियमों का उल्लंघन कर अवैध तरीके से आईटीसी का लाभ उठाया।
- दिल्ली की फर्जी फर्मों से लेन-देन: वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान फर्म ने दिल्ली की कई सप्लायर फर्मों से खरीद दिखाकर ₹1.39 करोड़ से अधिक का आईटीसी प्राप्त किया और उसका इस्तेमाल भी कर लिया।
- शुरुआत से ही निरस्त निकले रजिस्ट्रेशन: विभागीय सत्यापन में सामने आया कि दिल्ली स्थित जिन सप्लायर्स के बिलों पर यह आईटीसी लिया गया, उनके जीएसटी रजिस्ट्रेशन पंजीकरण की तिथि (Registration Date) से ही निरस्त पाए गए थे। इससे स्पष्ट हो गया कि बिना किसी वास्तविक सामान या सेवा की आपूर्ति के केवल कागजी लेन-देन (Fake Invoicing) किया गया था।
अब तक की जांच के प्रमुख आंकड़े
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विवरण |
राशि / स्थिति |
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चिह्नित संदिग्ध ITC (उपयोग किया जा चुका) |
₹1.39 करोड़ से अधिक |
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क्रेडिट लेजर में वर्तमान में उपलब्ध बची राशि |
₹27.47 लाख |
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कार्रवाई करने वाली टीम |
एनफोर्समेंट विंग-III, सर्किल-ए (जयपुर) |
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जांच का दायरा |
फर्जी बिलों के वास्तविक लेन-देन और नेटवर्क से जुड़ी अन्य फर्में
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विस्तृत जांच जारी, बढ़ सकती है कर अपवंचन की राशि
वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में क्रेडिट लेजर में उपलब्ध ₹27.47 लाख केवल बची हुई राशि है।
आगे की कार्रवाई: विभाग अब इस नेटवर्क से जुड़ी अन्य सहयोगी फर्मों की भूमिका और वास्तविक कर अपवंचन (Tax Evasion) का सटीक आकलन कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद कर चोरी की अंतिम राशि तय कर संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।