जयपुर में “पश्चिम अंचल राजभाषा सम्मेलन-2026” आयोजित, प्रशासनिक व तकनीकी कार्यों में हिंदी के प्रयोग पर बल

जयपुर/ नरेश गुनानी/कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), क्षेत्रीय कार्यालय जयपुर की ओर से कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में एक दिवसीय “पश्चिम अंचल राजभाषा सम्मेलन-2026” का आयोजन किया गया। इस क्षेत्रीय सम्मेलन में पश्चिम अंचल के पांच राज्यों—राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र—के राजभाषा संवर्ग के अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

​सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि एन. के. पाण्डेय (कुलगुरु, हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय) द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने प्रशासनिक कामकाज में हिंदी के अधिक से अधिक और प्रभावी उपयोग को जरूरी बताते हुए इसे कार्य-संपादन का एक सशक्त माध्यम करार दिया। उन्होंने वर्तमान डिजिटल और तकनीकी युग में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए ईपीएफओ द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

​कार्यक्रम की अध्यक्षता ईपीएफओ जयपुर कार्यालय के प्रभारी और क्षेत्रीय आयुक्त (प्रथम) परितोष कुमार ने की। आयोजन के दौरान स्वागत भाषण देते हुए सहायक निदेशक (राजभाषा) संजीव खीचड़ ने कार्यालयीन दायित्वों के निर्वहन में राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया और बताया कि कैसे हिंदी के माध्यम से सरकारी कामकाज को सरल, सुगम और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

​इस अवसर पर आंचलिक कार्यालय राजस्थान के प्रभारी राजभाषा एवं क्षेत्रीय आयुक्त (प्रथम) पी. सी. गुप्ता ने संगठन के विभिन्न कार्यालयों के बीच श्रेष्ठ कार्य-प्रणालियों और अनुभवों के आदान-प्रदान की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में हिंदी का दायरा बढ़ाने के लिए राजभाषा एवं अनुवाद अधिकारियों से और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

​सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी और विचार सत्रों में कार्यालयों में हिंदी के कार्यान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और उनके संभावित समाधानों पर विस्तृत मंथन हुआ। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि:

  • ​तकनीकी माध्यमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी के व्यापक उपयोग से इसे जन-जन तक सुलभ बनाया जा सकता है।
  • ​बदलते तकनीकी दौर के अनुरूप हिंदी को आधुनिक टूल्स के अनुकूल ढालना आवश्यक है।
  • ​अंग्रेजी के प्रभाव के बीच भी हिंदी का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है; अतः कार्यालयों में क्लिष्ट भाषा के बजाय सहज, सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा मिलना चाहिए।

​आयोजन में मुख्यालय के प्रतिनिधि और सहायक निदेशक सतीश कुमार झा भी उपस्थित रहे। मंच संचालन मधुर आचार्य ने किया, जबकि समन्वय की जिम्मेदारी कनिष्ठ अनुवाद अधिकारी मेनपाल ने संभाली।

​सम्मेलन के समापन पर सभी प्रतिभागियों से राजभाषा हिंदी को दैनिक कार्यालयीन कार्यों का अभिन्न अंग बनाने और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के संकल्प के साथ कार्यक्रम को संपन्न किया गया।

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