रिपोर्ट योगेश शर्मा
जयपुर। त्याग, धैर्य और पवित्रता की प्रतिमूर्ति, जगत जननी माता सीता का प्राकट्य उत्सव ‘जानकी नवमी’ शनिवार को राजधानी जयपुर में हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। वैशाख शुक्ल नवमी के इस पावन अवसर पर शहर के प्रमुख श्रीराम मंदिरों में सुबह से ही उत्सव का माहौल रहा। कहीं दूध-दही की धाराओं से अभिषेक हुआ, तो कहीं रत्नजड़ित आभूषणों से माता का श्रृंगार किया गया।
प्रमुख मंदिरों में हुआ विशेष आयोजन
उत्सव के केंद्र में रहे गालव ऋषि की तपोस्थली श्रीगलताजी और चांदपोल स्थित प्राचीन श्री रामचंद्र जी मंदिर। गलता पीठ में पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशाचार्य महाराज के सान्निध्य में माता जानकी के विग्रह का अभिषेक कर ऋतु पुष्पों से भव्य श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर स्वामी जी ने कहा कि माता जानकी का जीवन धर्म और समर्पण की सर्वोच्च पाठशाला है।
मंदिरों की झलकियाँ: जहाँ उमड़ा आस्था का सैलाब
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मंदिर का नाम |
मुख्य आकर्षण एवं आयोजन |
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प्राचीन श्री रामचंद्र जी मंदिर, चांदपोल |
101 किलो देसी गाय के दूध से अभिषेक, रत्नजड़ित आभूषण और माता के चरण दर्शन। |
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श्री सीताराम जी मंदिर, छोटी चौपड़ |
51 किलो पंचामृत से अभिषेक, बधाई गान और दोपहर में भव्य महाआरती। |
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खोले के हनुमान जी (सीताराम मंदिर) |
माता सीता का षोडशोपचार पूजन एवं विशेष जन्माभिषेक। |
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गलता तीर्थ |
ऋतु पुष्पों से मनोरम झांकी एवं स्वामी अवधेशाचार्य का आध्यात्मिक उद्बोधन। |
दुर्लभ ‘चरण दर्शन’ के लिए उमड़ी भीड़
चांदपोल बाजार स्थित प्राचीन श्री रामचंद्र जी मंदिर में जानकी नवमी के दिन भक्तों को माता सीता के चरणों के दर्शन कराए गए, जो वर्ष में केवल विशेष अवसरों पर ही सुलभ होते हैं। महंत नरेंद्र तिवाड़ी के सान्निध्य में भगवान को सोने-चांदी के कड़े, चरण फूल और पायल धारण करवाई गई। इस दुर्लभ झांकी के दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
बधाई गान और ‘उछाल’ की परंपरा
उत्सव के दौरान मंदिरों में ‘त्रिवेणी संगम’ देखने को मिला—भजन, कीर्तन और उछाल। छोटी चौपड़ स्थित सीताराम जी मंदिर में भक्तों ने:
- “आजु महा मंगल मिथिलापुर घर-घर बजत बधाई…”
- “जनक भवन में आनंद भारी…”
जैसे पदों का गायन कर वातावरण को ‘मिथिलामय’ बना दिया। श्रद्धालुओं के बीच फल, खिलौने, टॉफी और चॉकलेट की उछाल की गई, जिसे प्रसाद के रूप में पाने के लिए भक्त लालायित दिखे।
शहर भर में गूंजे जयकारे
जानकी नवमी का यह उत्सव केवल चुनिंदा मंदिरों तक सीमित नहीं रहा। सोडाला, आदर्श नगर, स्टेशन रोड और मुरलीपुरा स्कीम स्थित श्रीराम मंदिरों में भी जानकी नवमी धूमधाम से मनाई गई। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच माता सीता का जन्माभिषेक संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने भाग लिया।
“सीता माता का जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और मर्यादा में रहने की प्रेरणा देता है। आज का उत्सव उसी शक्ति और भक्ति को समर्पित है।”
— महंत एवं धर्मगुरु