रिपोर्ट योगेश शर्मा
जयपुर। गोमाता के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियान ने अब गति पकड़ ली है। आगामी 27 अप्रैल को आयोजित होने वाले ‘गौ सम्मान दिवस’ की पूर्व तैयारियों को लेकर राजधानी जयपुर के सांगानेर स्थित अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद में एक विशाल संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस बैठक में राजस्थान सहित देशभर से आए गौभक्तों, संतों और किसानों ने गोसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
किसानों ने संभाली कमान: राजस्थान बनेगा अभियान का केंद्र
संगोष्ठी में इस बार किसानों की भागीदारी सबसे प्रमुख रही। परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक और मुख्य वक्ता अतुल गुप्ता ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों ने इस अभियान को ‘जन-आंदोलन’ बनाने के लिए ठोस रणनीति तैयार की है।
- संकल्प: किसानों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने की इस मुहिम में राजस्थान पूरे देश का नेतृत्व करेगा।
- आह्वान: समाज के हर वर्ग—चाहे वह छात्र हो, व्यापारी हो या गृहणी—सभी से इस पावन अभियान में सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की गई है।
प्रमुख माँगें: गौ संरक्षण के लिए आर-पार की लड़ाई
अतुल गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस विधायी माँगें हैं। 27 अप्रैल को प्रदेश के प्रत्येक तहसील, उपखंड और जिला मुख्यालय पर प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
ज्ञापन की मुख्य माँगें निम्न प्रकार हैं:
- केंद्रीय कानून: पूरे देश में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए सख्त केंद्रीय कानून लागू करना।
- संवैधानिक दर्जा: गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करना।
- कठोर दंड: गौतस्करी करने वालों के खिलाफ गैर-जमानती और कठोर दंड का प्रावधान।
- संसाधन: प्रदेश की गौशालाओं को आर्थिक और बुनियादी रूप से सुदृढ़ करना।
- अनुसंधान: पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर) आधारित चिकित्सा और शोध को सरकारी प्रोत्साहन देना।
संगोष्ठी में उमड़ा गौभक्तों का हुजूम
सांगानेर में आयोजित इस कार्यक्रम में संतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि गोवंश का संरक्षण केवल धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है।
“जनता को इस अभियान से जोड़कर ही हम गोमाता को उनका खोया हुआ सम्मान वापस दिला सकते हैं। 27 अप्रैल का दिन जयपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के इतिहास में गौ-सेवा के लिए स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।” > — अतुल गुप्ता, अंतरराष्ट्रीय संयोजक
तैयारियों का जायजा
कार्यक्रम के समापन पर कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं। आने वाले दिनों में जयपुर के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क कर लोगों को 27 अप्रैल के कार्यक्रमों की जानकारी दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक संख्या में लोग ज्ञापन देने और आयोजन में शामिल होने पहुँच सकें।