जयपुर में कमला एकादशी पर अद्भुत संयोग: गणेश मंदिरों में प्रथम पूज्य ने किया जल विहार, विष्णु मंदिरों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

जयपुर। योगेश शर्मा 

राजधानी जयपुर में कमला एकादशी के पावन अवसर पर चारों ओर भक्ति, साधना और अध्यात्म का अनूठा माहौल देखने को मिला। इस विशेष तिथि पर गुलाबी नगरी के विभिन्न विष्णु और कृष्ण मंदिरों में जहां विशेष पूजा-अर्चना, भव्य महाआरती और भजन-कीर्तन के आयोजन हुए, वहीं प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश के दर पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अधिकमास की इस एकादशी के पावन मौके पर शहर के प्रमुख गणेश मंदिरों में भगवान को गर्मी से राहत दिलाने के लिए जल विहार कराया गया और मनमोहक फूल बंगला झांकियां सजाई गईं。

​मोतीडूंगरी और गढ़ गणेश सहित विभिन्न मंदिरों में सजीं दिव्य झांकियां

​बुधवार को अधिकमास की एकादशी के विशेष सुअवसर पर जयपुर के अराध्य देव मोतीडूंगरी गणेश जी, गढ़ गणेश, नहर के गणेश जी, सिद्धी विनायक मंदिर, गलता गेट स्थित गीता गायत्री गणेश मंदिर, बंगाली बाबा गणेश आश्रम और बड़ी चौपड़ स्थित ध्वजाधीश गणेश जी सहित तमाम छोटे-बड़े गणपति मंदिरों में नयनाभिराम फूल बंगला झांकी के दर्शन हुए।

​मोतीडूंगरी गणेश जी सहित कई प्रमुख सिद्ध पीठों में विशेष रूप से ‘जल विहार’ की भव्य झांकी सजाई गई। इस दौरान प्रथम पूज्य गजानन महाराज काफी देर तक फव्वारों और जल धाराओं के बीच जल विहार का आनंद लेते नजर आए, जिसके गवाह बनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में मौजूद रहे।

​नक्षत्रों और वार का बना दुर्लभ संयोग, बढ़ा आध्यात्मिक महत्व

​इस बार कमला एकादशी पर ग्रहों और नक्षत्रों का बेहद अनूठा और कल्याणकारी गणितीय योग देखने को मिला। विख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि इस बार एकादशी तिथि पर चित्रा-स्वाति नक्षत्र, बुधवार का दिन और चंद्रमा के विशेष राशि गोचर का एक अत्यंत दुर्लभ संयोग बना है। अधिकमास में इस प्रकार के महासंयोग का आना साधना, मंत्र जाप, गुप्त दान, तर्पण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम और शीघ्र फलदायी माना जाता है। यही वजह रही कि श्रद्धालुओं ने सुबह से ही इस पुण्य काल का लाभ उठाने के लिए विशेष अनुष्ठान किए।

​भगवान विष्णु का पंचामृत अभिषेक, जरूरतमंदों को किया दान

​दिनभर व्रत-उपवास रखकर श्रद्धालुओं ने जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की संयुक्त आराधना की। विष्णु मंदिरों में भगवान का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से भव्य पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद ठाकुर जी को पीले वस्त्र, पीले पुष्प, चंदन और बेहद प्रिय तुलसी दल अर्पित कर महाभोग लगाया गया।

​मंदिर परिसरों और घरों में भक्तों ने सामूहिक व व्यक्तिगत रूप से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ और ‘विष्णु सहस्रनाम’ के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप किया। इस पावन दिन के उपलक्ष्य में शहर के कई धार्मिक संगठनों और दानदाताओं द्वारा राहगीरों के लिए ठंडे पानी व शर्बत की प्याऊ लगाई गई, साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल और नगद धन का दान देकर पुण्य कमाया गया।

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