जयपुर: भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महोत्सव का शुभारंभ; वराह अवतार प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

जयपुर। योगेश शर्मा 

सीकर रोड, डहर का बालाजी स्थित प्रसिद्ध सियाराम जी की बगीची में मंगलवार को धर्म और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिला। यहाँ विशाल कलश यात्रा के साथ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में भारी उत्साह है और प्रथम दिन ही कथा पंडाल श्रद्धालुओं की भीड़ से पूरी तरह सराबोर नजर आया।

मंगल गीतों और पुष्पवर्षा के बीच निकली भव्य कलश यात्रा

​कथा के शुभारंभ के अवसर पर सुबह राधागोविंद मंदिर से एक विशाल एवं भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी और मांगलिक वेशभूषा में सिर पर मंगल कलश धारण कर शामिल हुईं।

​यात्रा के दौरान श्रद्धालु बैंड-बाजे की मधुर धुनों पर थिरकते और भगवान के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। महिलाएं भजन और मंगल गीत गाती हुई कथा स्थल (सियाराम जी की बगीची) तक पहुँचीं। कलश यात्रा का मार्ग में जगह-जगह स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा कर और आरती उतारकर भव्य स्वागत किया गया।

अधिक मास का पुण्य: गलता तीर्थ स्नान के बाद हुआ कथा का श्रीगणेश

​कथा प्रारंभ होने से पूर्व, इस वर्ष के विशेष धार्मिक महत्व को देखते हुए अधिक मास के पुण्य अवसर पर कथा व्यास महन्त हरिशंकर दास वेदान्ती ने पवित्र गलता तीर्थ (जयपुर) पहुंचकर स्नान किया। वहाँ उन्होंने भगवान का विधिवत पूजन-अर्चन व अभिषेक किया और कथा महोत्सव की मंगल शुरुआत की। इसके बाद मुख्य कथा पंडाल में विधि-विधान से भागवत जी का पूजन, श्रीमद्भागवत महात्म्य तथा शुकदेव जी के आगमन के दिव्य प्रसंग का सुंदर वर्णन किया गया।

प्रथम दिवस: ‘जब-जब होती है धर्म की हानि, तब-तब प्रभु लेते हैं अवतार’

​कथा के प्रथम दिन व्यासपीठ से महन्त हरिशंकर दास वेदान्ती ने भगवान वराह अवतार की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण और सजीव वर्णन किया। उन्होंने सनातन धर्म की व्याख्या करते हुए कहा:

​”जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब-तब मर्यादा और सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विभिन्न रूपों व अवतारों में प्रकट होते हैं। भगवान का वराह अवतार हमें संकट के समय धैर्य रखने और अधर्म के नाश की प्रेरणा देता है।”

 

​कथा श्रवण के लिए पहले ही दिन बड़ी संख्या में मातृशक्ति और स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के भजनों पर झूमते भक्तों से पूरा परिसर भक्ति रस में डूब गया।

कथा का समय और आगामी कार्यक्रम

​आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह दिव्य कथा महोत्सव 8 जून तक प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा। आगामी दिनों में कथा में श्रीकृष्ण जन्म, छप्पन भोग, रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित्र जैसे कई अलौकिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। कथा के अंतिम दिन (8 जून को) विशेष हवन, पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारा प्रसादी का आयोजन होगा, जिसमें सभी क्षेत्रवासी प्रसादी ग्रहण करेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

Block title
Related

प्रशिक्षण शिविर भविष्य के प्रोफेशन के लिए प्रथम सीढ़ी: बसंत जैन

​आत्मनिर्भर महिला मंच का 25 दिवसीय ग्रीष्मकालीन निशुल्क प्रशिक्षण...