योगेश शर्मा
जयपुर | 12, मई, 2026
राजस्थान की राजधानी जयपुर के इतिहास का वह काला अध्याय आज भी शहरवासियों के जेहन में ताजा है, जब 13 मई 2008 को गुलाबी नगरी सिलसिलेवार बम धमाकों से दहल उठी थी। आज इस त्रासदी को 18 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन दोषियों को अब तक सजा न मिलना शहर के व्यापारियों और आम जनता के बीच भारी आक्रोश का कारण बना हुआ है।
दोषियों को फांसी से कम कुछ मंजूर नहीं: सुरेश सैनी
जयपुर व्यापार महासंघ के महामंत्री सुरेश सैनी ने इस अवसर पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए इसे न्याय व्यवस्था की विफलता बताया। उन्होंने कहा:
”आज से 18 साल पहले आतंकियों ने जोहरी बाजार, छोटी चौपड़, किशनपोल और चांदपोल जैसे व्यस्ततम व्यापारिक क्षेत्रों को निशाना बनाकर जयपुर की धड़कन रोकने की कोशिश की थी। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि करीब दो दशक बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। दोषियों को सजा न मिलना उन मासूमों की शहादत का अपमान है।”
व्यापार महासंघ की प्रमुख माँगें
महासंघ ने सरकार और न्यायपालिका के समक्ष तीन प्रमुख बिंदु रखे हैं:
- त्वरित दंड: शेष दोषियों को अविलंब चिन्हित कर फांसी की सजा दी जाए।
- मुआवजा और पुनर्वास: जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उन्हें सरकार की ओर से अतिरिक्त सहायता और उचित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।
- जीरो टॉलरेंस पॉलिसी: आतंकवाद के खिलाफ कड़े कानूनों का क्रियान्वयन हो ताकि भविष्य में जयपुर की शांति भंग करने की कोई हिम्मत न कर सके।
यादों में वह ‘काला दिन’
उल्लेखनीय है कि 2008 में हुए इन धमाकों में साइकिलों का इस्तेमाल कर भीड़भाड़ वाले इलाकों में विस्फोट किए गए थे। सैकड़ों परिवारों ने अपने घर के मुखिया और बच्चों को खो दिया था। जयपुर व्यापार महासंघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोषियों को उनके अंजाम तक नहीं पहुँचाया जाता, व्यापारियों का संघर्ष और मांग जारी रहेगी।