गौरव कोचर
जयपुर। जयपुर पश्चिम जिला पुलिस ने वाहन लोन दिलाने के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना और 7500 रुपये के इनामी अपराधी कैलाश पूनिया को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने अब तक दो दर्जन से अधिक लोन आवेदकों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस उपायुक्त जयपुर पश्चिम प्रशांत किरण ने बताया कि इस मामले का खुलासा तब हुआ जब 3 फरवरी 2026 को जोबनेर निवासी महावीर सिंह नाथावत ने रिपोर्ट दर्ज कराई। परिवादी को ट्रैक्टर के लिए लोन चाहिए था, जिसके लिए वह करधनी स्थित ‘यूएच फाइनेंशियल सर्विसेज’ के कार्यालय में सुभाष घासल, कैलाश पूनिया और आयुषी पारीक से मिला।
आरोपियों ने लोन दिलाने का झांसा देकर परिवादी से खाली चेक और करीब 150 पेज के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिए। बाद में सिबिल स्कोर खराब होने का बहाना बनाकर आवेदन निरस्त कर दिया। कुछ समय बाद परिवादी को ‘RMK फिनकॉर्प’ से 32,556 रुपये की बकाया वसूली का नोटिस मिला, तब उसे पता चला कि आरोपियों ने उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर उसके नाम पर खुद लोन उठा लिया है।
काम करने का तरीका (Modus Operandi)
आरोपी कैलाश पूनिया और उसके साथी लोन के इच्छुक लोगों को जाल में फंसाते थे। वे लोन राशि को आवेदक के खाते में न भेजकर, धोखाधड़ी से अपनी जानकार फर्म ‘यूएच फाइनेंशियल सर्विसेज’ के बैंक खातों में ट्रांसफर (क्लियर) करवा लेते थे।
7500 का इनाम और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश गुप्ता और सहायक पुलिस आयुक्त आलोक कुमार के सुपरविजन में एक विशेष टीम गठित की गई। वारदात के बाद आरोपी राजस्थान से बाहर फरार हो गया था, जिस पर पुलिस ने 7500 रुपये का इनाम घोषित किया था। अंततः पुलिस टीम ने सफलता हासिल करते हुए 8 मई 2026 को आरोपी को धर दबोचा।
अपराधिक रिकॉर्ड और पूर्व का इतिहास
पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी कैलाश पूनिया आदतन अपराधी है।
- वर्ष 2020 में उसने ‘विनायक फाइनेंस’ के नाम से फर्म चलाकर NBFC कंपनियों के साथ धोखाधड़ी की थी।
- अकेले करधनी थाने में उसके खिलाफ इसी प्रकार के अपराध के 6 अलग-अलग मामले दर्ज हैं।
- आरोपी फिलहाल पुलिस अभिरक्षा में है और गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
गठित पुलिस टीम:
सवाई सिंह पुलिस निरीक्षक, भूपेन्द्र सिंह सहायक उप निरीक्षक, बहादुर सिंह हैड कानि (साईबर शाखा), किशोर सिंह कानि।