नरेश गुनानी
जयपुर, 1 अप्रैल। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ जयपुर विद्युत वितरण निगम ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के निर्देशन में कार्य करते हुए निगम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्व संग्रहण के अपने पिछले 26 वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य आंकड़े:
- कुल राजस्व वसूली: 29,462 करोड़ रूपए से अधिक।
- कुल बिलिंग राशि: 28,863 करोड़ रूपए।
- अतिरिक्त संग्रहण: 599 करोड़ रूपए (पुराने बकायादारों से वसूली)।
- राजस्व प्रतिशत: 102% (26 वर्षों के इतिहास में सर्वाधिक)।
- एटी एंड सी (AT&C) लॉसेस: पहली बार 10% से कम (9.24%) के स्तर पर।
जोन और सर्किल का प्रदर्शन: भरतपुर जोन और करौली सर्किल रहे टॉप पर
राजस्व वसूली के मामले में निगम के सभी 18 सर्किलों ने शत-प्रतिशत का आंकड़ा पार किया है।
- भरतपुर जोन: तीनों जोन में सर्वाधिक 104.63% राजस्व प्राप्त कर प्रथम स्थान पर रहा। यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भरतपुर, डीग, धौलपुर और करौली जैसे जिलों में वसूली चुनौतीपूर्ण मानी जाती रही है।
- कोटा जोन: 103.64% राजस्व के साथ दूसरे स्थान पर।
- जयपुर जोन: 101.32% राजस्व अर्जित किया।
- सर्किल वार प्रदर्शन: करौली सर्किल 108.80% वसूली के साथ पूरे डिस्कॉम में शीर्ष पर रहा। इसके बाद बूंदी (105.66%) और कोटा (104.08%) का स्थान रहा।
कैसे हासिल हुआ यह मुकाम?
जयपुर डिस्कॉम ने इस ऐतिहासिक सफलता के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम किया:
- सख्त निगरानी: मुख्यालय से लेखा शाखा के अधिकारियों को प्रत्येक सर्किल में नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया, जिन्होंने सब-डिवीजन स्तर तक आ रही बाधाओं को दूर किया।
- पुराने बकाया की वसूली: 50 हजार और 20 हजार से अधिक के बकाया वाले पीडीसी (PDC) उपभोक्ताओं की सूची बनाकर उनसे रिकवरी सुनिश्चित की गई। साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया कि बकाया न चुकाने वाले उपभोक्ता किसी अन्य परिजन के नाम से नया कनेक्शन न ले पाएं।
- शून्य खराब मीटर (Zero Defective Meter): पहली बार सभी सर्किलों को डिफेक्टिव मीटर से मुक्त किया गया। इससे औसत बिलिंग के बजाय वास्तविक उपभोग के आधार पर शत-प्रतिशत बिलिंग संभव हुई।
- अन्तर्विभागीय समन्वय: जलदाय विभाग, पंचायती राज और नगरीय निकायों पर बकाया राशि जमा कराने के लिए विशेष प्रयास किए गए।
- लोक अदालतों का सहारा: बिजली चोरी के पुराने मामलों को लोक अदालतों के माध्यम से आपसी सहमति से सुलझाया गया।
बिजली छीजत में ऐतिहासिक गिरावट
निगम ने न केवल वसूली बढ़ाई, बल्कि बिजली के नुकसान को भी न्यूनतम स्तर पर लाने में सफलता पाई है। आरडीएसएस (RDSS) योजना के माध्यम से विद्युत तंत्र को सुदृढ़ किया गया। परिणामस्वरूप:
- वितरण हानियाँ: 11.02% तक सिमट गईं।
- एटी एंड सी हानियाँ: अब तक के न्यूनतम स्तर 9.24% पर आ गई हैं।
कुसुम और पीएम सूर्यघर योजना के माध्यम से सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने से भी तंत्र पर दबाव कम हुआ है और दक्षता बढ़ी है।
पिछले वर्षों का राजस्व तुलनात्मक चार्ट (प्रमुख वर्ष):
|
वित्तीय वर्ष |
राजस्व संग्रहण (%) |
|---|---|
|
2025-26 |
102.00% (रिकॉर्ड) |
|
2024-25 |
100.79% |
|
2017-18 |
101.02% |
|
2013-14 |
96.08% |
|
2004-05 |
99.68% |
जयपुर डिस्कॉम की इस उपलब्धि ने प्रदेश के अन्य बिजली निगमों के लिए भी एक मानक स्थापित कर दिया है।
