योगेश शर्मा
जयपुर। राजधानी के सुशीलपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण स्थिति भयावह हो गई है। पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने राज्य सरकार, नगर निगम और जलदाय विभाग पर गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि गंदा पानी पीने से क्षेत्र के सैकड़ों लोग बीमार हैं और दो दर्जन से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं।
मुख्यमंत्री आवास से महज 1 किमी दूर जल संकट
खाचरियावास ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि मुख्यमंत्री निवास से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित सुशीलपुरा के लोग बूंद-बूंद साफ पानी के लिए तरस रहे हैं। पिछले दो महीनों से क्षेत्र में पीने के पानी की भारी किल्लत है और सरकार टैंकरों तक की व्यवस्था नहीं कर पा रही है।
10 करोड़ के टेंडर पर उठाए सवाल, भ्रष्टाचार के आरोप
पूर्व मंत्री ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए स्थानीय विधायक और अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा:
- जो सड़क पूरी तरह ठीक थी, उसे तोड़कर दोबारा बनाने के लिए 10 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया, जो जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग है।
- स्थानीय नागरिकों ने दिन में सड़क तोड़ने का विरोध किया था, लेकिन विधायक के दबाव में रात के अंधेरे में सड़क तोड़ दी गई।
- सड़क तोड़ने के दौरान सीवरेज और पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे पेयजल में गंदा पानी मिल गया और यह स्वास्थ्य संकट खड़ा हुआ।
50 हजार की आबादी संकट में, दी आंदोलन की चेतावनी
खाचरियावास ने बताया कि सीवरेज लाइन, पानी की लाइन और सड़क तीनों बंद होने से करीब 50 हजार की आबादी के सामने जीवन यापन का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कल तक टैंकरों के माध्यम से पानी की सुचारू व्यवस्था नहीं की गई, तो दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन किया जाएगा।
”गंदे पानी की समस्या ने अब विकराल रूप ले लिया है। यदि तुरंत स्वास्थ्य विभाग की टीमों को नहीं लगाया गया तो बड़ी जनहानि हो सकती है। मुख्यमंत्री को खुद इस क्षेत्र का दौरा कर बीमार लोगों की सुध लेनी चाहिए और जल्द से जल्द साफ पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।”
— प्रताप सिंह खाचरियावास, पूर्व मंत्री
