शाम-ए-शब्द के मंच पर प्रतिभागियों ने दिखाई रचनात्मकता की अनूठी मिसाल, प्रस्तुति देख भावुक हुईं बहन तृप्ति पांडे
योगेश शर्मा
जयपुर। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जयपुर में साहित्य, कला और रचनात्मक अभिव्यक्तियों को एक नया आसमान देने वाले प्रतिष्ठित मंच ‘शाम-ए-शब्द’ द्वारा एक बेहद अनूठे और ऊर्जावान कार्यक्रम ‘ऐड सेट गो’ का आयोजन किया गया। स्थानीय कला प्रेमियों और दर्शकों के भारी उत्साह के बीच सम्पन्न हुई इस अनूठी प्रतियोगिता की मुख्य थीम “सदाबहार विज्ञापनों को फिर से जीवंत करना” रखी गई थी। इसमें प्रतिभागियों ने भारतीय टेलीविजन इतिहास के कुछ सबसे प्रतिष्ठित और यादगार विज्ञापनों को अपने अभिनय, जीवंत प्रस्तुति और नए अंदाज़ से मंच पर उतारकर दर्शकों को पुरानी यादों के सफर पर ले गए।
प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल ने परखा हुनर
विज्ञापन जगत की इस रचनात्मक जंग को परखने के लिए निर्णायक मंडल (ज्यूरी) में कला, साहित्य और विज्ञापन जगत की जानी-मानी हस्तियां शामिल थीं। प्रतियोगिता के जजों में:
- कमला पोद्दार (प्रतिष्ठित उद्यमी एवं शिक्षाविद)
- विनोद भारद्वाज (वरिष्ठ कला समीक्षक व लेखक)
- तृप्ति पांडे (वरिष्ठ पर्यटन व संस्कृति विशेषज्ञ)
- अर्चना जी
निर्णायक मंडल ने बारीकी से प्रतिभागियों के अभिनय, टीम वर्क, रचनात्मकता और विज्ञापन के मूल संदेश को नए रूप में प्रस्तुत करने के कौशल का मूल्यांकन किया।
क्रिएटिव गुरु पीयूष पांडे को भावुक ट्रिब्यूट
इस कार्यक्रम का सबसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण वह था, जब विज्ञापन जगत के भीष्म पितामह और प्रसिद्ध क्रिएटिव दिग्गज पीयूष पांडे को एक विशेष ट्रिब्यूट (श्रद्धांजलि/सम्मान) प्रस्तुत किया गया। ‘मजलिस शाम-ए-शब्द’ के फाउंडर निखिल कपूर द्वारा तैयार और प्रस्तुत की गई इस भावपूर्ण श्रद्धांजलि ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।
“पीयूष पांडे को जल्द ही पद्म भूषण मिलने वाला है…”
मंच पर भाई पीयूष पांडे के सफर और उनके योगदान को देखकर बतौर जज मौजूद उनकी बहन तृप्ति पांडे अपने आंसू नहीं रोक पाईं। उन्होंने बेहद भावुक होते हुए कहा, “जयपुर पीयूष को बेहद प्यार करता है। इस खूबसूरत ट्रिब्यूट को देखकर मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकी। मुझे यह साझा करते हुए गर्व हो रहा है कि पीयूष पांडे को जल्द ही ‘पद्म भूषण’ से नवाजा जाने वाला है।”
इन्होंने मारी बाजी: विजेताओं की घोषणा
प्रतियोगिता में सभी टीमों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं, जिससे जजों के लिए विजेताओं का चुनाव करना काफी चुनौतीपूर्ण रहा। कड़े मुकाबले के बाद परिणाम इस प्रकार रहे:
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स्थान |
विजेता टीम के सदस्य |
|---|---|
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प्रथम पुरस्कार (Winner) |
अभिषेक मिश्रा, दीपा माथुर, निखिल कपूर, रजनीश सिंहली और गरिमा की टीम |
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द्वितीय पुरस्कार (Runner-up) |
चेतना शर्मा और उनकी टीम |
कला और संस्कृति को समर्पित दो साल का सफर
कार्यक्रम के समापन पर ‘शाम-ए-शब्द’ के कोर फाउंडर्स—दीपा माथुर, विजय गोलेछा, अभिषेक मिश्रा, वरुण भंसाली और निखिल कपूर ने मंच के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
संस्थापकों ने बताया कि:
- ’शाम-ए-शब्द’ एक ऐसा साझा मंच है, जिसका उद्देश्य नवोदित और स्थापित कलाकारों को अपनी छिपी प्रतिभा प्रदर्शित करने का समान अवसर देना है।
- यह मंच पिछले दो वर्षों से लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
- हर महीने मंच के सभी सदस्य एक विशेष थीम पर एकत्रित होते हैं, जहां वे अपनी अनूठी और रचनात्मक प्रस्तुतियां देकर गुलाबी नगरी की कला-संस्कृति को आगे बढ़ाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।