जयपुर/योगेश शर्मा/नगर निगम चुनाव के तहत विद्याधर नगर क्षेत्र का वार्ड संख्या 9 इस समय राजधानी की सबसे चर्चित और हॉट सीट में तब्दील हो चुका है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों—भाजपा और कांग्रेस—द्वारा जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की अनदेखी किए जाने से उपजे जन-आक्रोश ने यहाँ चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। राजनीतिक दलों की उपेक्षा से आहत स्थानीय निवासियों और नाराज कार्यकर्ताओं ने आपसी सहमति से संगीता बढ़ारा को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतार दिया है, जिससे यहाँ मुकाबला पूरी तरह त्रिकोणीय हो गया है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और ‘पैराशूट’ कल्चर से नाराजगी
वार्ड-9 के मतदाताओं और कार्यकर्ताओं में टिकट वितरण को लेकर भारी रोष देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का खुला आरोप है कि प्रमुख राजनीतिक दलों ने सालों से जमीन पर पसीना बहाने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर पैराशूट प्रत्याशियों और धनबल को प्राथमिकता दी है। इसी उपेक्षा के जवाब में क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों, विभिन्न विकास समितियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर स्थानीय चेहरे के रूप में संगीता बढ़ारा का समर्थन करने का फैसला किया है।
घर-घर जनसंपर्क शुरू, जीत का लिया संकल्प
बुधवार को वार्ड के सैकड़ों गणमान्य लोग संगीता बढ़ारा के आवास पर एकत्रित हुए और औपचारिक रूप से उनके पक्ष में प्रचार-प्रसार की शुरुआत की। उपस्थित जनसमूह ने उन्हें भारी मतों से विजयी बनाने का सामूहिक संकल्प दिलाया। भवानी नगर मंडल के पदाधिकारियों और राधाकृष्ण मंदिर विकास समिति से जुड़े प्रमुख सदस्यों ने बढ़ारा को जीत का आशीर्वाद देते हुए चुनाव में पूरी ताकत झोंकने की बात कही।
इस दौरान रघुवर सिंह नाथावत, वीरेन्द्र पारीक, सुरेंद्र खंडेलवाल, कन्हैया लाल यादव, अनुराग, अमित, विजयपाल और पवन सहित मातृशक्ति की ओर से इंदू शर्मा, उर्मिला चौधरी, प्रियंका शर्मा, एडवोकेट सरिता शर्मा, मीनू शर्मा, अनीता अग्रवाल व रेखा अग्रवाल ने खुलकर बढ़ारा की उम्मीदवारी का समर्थन किया।
”20 साल की सेवा के बदले मिला सिर्फ आश्वासन”: संगीता बढ़ारा
समर्थन जुटाने के दौरान भावुक और आक्रामक तेवरों के साथ संगीता बढ़ारा ने कहा कि उनका परिवार परंपरागत रूप से भाजपा से जुड़ा रहा है और उन्होंने स्वयं बीते 20 वर्षों से क्षेत्र में पार्टी की निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में सेवा की है। उन्होंने कहा:
”मैंने वार्ड-9 से सेवा भाव के आधार पर पार्टी टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन हर बार केवल खोखले आश्वासन ही हाथ लगे। इस बार भी जब पार्टी ने समर्पित कार्यकर्ताओं की भावनाओं को दरकिनार कर बाहरी प्रत्याशी को प्राथमिकता दी, तो स्थानीय जनता और कार्यकर्ताओं के आग्रह पर ही मैंने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला लिया है।”
वार्ड के प्रमुख नागरिकों की भारी लामबंदी
निर्दलीय प्रत्याशी संगीता बढ़ारा के पक्ष में वार्ड के विभिन्न वर्गों, व्यापारिक समूहों और कॉलोनियों के निवासियों ने लामबंदी तेज कर दी है। समर्थन देने वालों में प्रमुख रूप से अनंत बढ़ारा, अमित बढ़ारा, राजगोपाल, श्रीगोपाल, संपत बढ़ारा, दिव्या पारवानी, ममता पारीक, मधु शर्मा, मुरारी लाल चौटिया, सुनीता मीणा, नीतू मीना, महेन्द्र डीडवानियां, पिंकी जैन, सुनीता काबरा, किरण सोनी, भरत खोवाल, दीपक अग्रवाल, सुरेंद्र सिंह भाटी, श्याम सुंदर अग्रवाल, बंशीधर अग्रवाल, चंद्रप्रकाश शर्मा, सुरेश जांगिड़, कविता बढ़ारा, अनुष्का खांडल, अविका खांडल, राहुल चोटिया, संतोष सैनी, सुनीता अग्रवाल, ममता जांगिड़, राजेश अग्रवाल, ज्योत्सना शर्मा, महेश दीक्षित, अनिल शर्मा, जगदीश प्रसाद शर्मा, अमित शर्मा, स्नेहलता शर्मा, मनोज प्रजापत, नंदकिशोर शर्मा, प्रदीप अग्रवाल, रामबाबू भारद्वाज, मनोज प्रजापति, संग्राम सिंह, सीताराम सैन, राजेंद्र पारीक, मोहन सैनी, दीपक शर्मा, भवानी सिंह शेखावत, मुरारी लाल प्रजापत, जगदीश सैनी, श्याम शर्मा, सुरेंद्र सिंह, राम बल्लभ भाटीवाला, ललित शर्मा, अमित शुक्ला, अशोक मीणा, पवन शर्मा, अंकित शर्मा, संजय शर्मा, तेजस्विनी शर्मा, सतपाल गुर्जर, कमलेश, संगीता, सुरेंद्र भाटी, संजीव कुमावत, बनवारी कुमावत, मुकेश अग्रवाल और संजय खंडेलवाल शामिल हैं।
वार्ड-9 में स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा अब पूरी तरह हावी हो चुका है। स्थानीय निवासियों के इस खुले समर्थन और बगावती तेवरों के चलते दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के लिए चुनावी राह बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है।