जयपुर की चर्चित पिंजरापोल गौशाला पर चला सरकारी डंडा: जहरीले पानी से उगाया चारा नष्ट, गंदे नाले को मिट्टी से पाटा

वित्तीय अनियमितताओं और भूमि विवादों के बीच प्रशासन सख्त; तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी कर रही है जांच

जयपुर। योगेश शर्मा 

राजधानी की प्रतिष्ठित और चर्चित पिंजरापोल गौशाला समिति में चल रही आर्थिक अनियमितताओं, भूमि उपयोग विवाद और गौसेवा व्यवस्थाओं में गड़बड़ियों के मामलों में अब राज्य सरकार ने पूरी तरह सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मीडिया में लगातार आ रही खबरों और शिकायतों के बाद प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय हो गया है। विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा लगातार गौशाला परिसर का औचक निरीक्षण कर जमीनी हकीकत की जांच की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में किसी बड़ी कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना गहरा गई है।

गायों की सेहत से खिलवाड़: जहरीला चारा काटकर किया खुर्द-बुर्द

​प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद गौशाला परिसर में एक बेहद गंभीर मामले पर त्वरित कार्रवाई की गई:

  • चारे को किया नष्ट: गौशाला परिसर में गंदे नाले के जहरीले और प्रदूषित पानी से बड़े पैमाने पर हरा चारा उगाया जा रहा था। अधिकारियों की मौजूदगी में मजदूरों को लगाकर इस पूरे चारे को कटवाकर मौके पर ही नष्ट (खुर्द-बुर्द) करवा दिया गया, ताकि यह जहरीला चारा किसी भी स्थिति में गायों को न परोसा जा सके।
  • नाला किया बंद: भविष्य में दोबारा इस जहरीले पानी का उपयोग न हो, इसके लिए गंदे पानी के नाले को जेसीबी और मिट्टी डालकर पूरी तरह से पाट दिया गया।
  • प्रबंधन को चेतावनी: मौके पर मौजूद गोपालन विभाग के अधिकारियों ने संपूर्ण स्थिति का जायजा लिया और गौशाला प्रबंधन को दोटूक शब्दों में चेतावनी देते हुए विभागीय नियमों की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जांच के दायरे में पिंजरापोल गौशाला: ये हैं गंभीर आरोप

​पिंजरापोल गौशाला समिति लंबे समय से राज्य सरकार और गोपालन विभाग की रडार पर है। प्रबंधन पर निम्नलिखित गंभीर आरोप लगे हैं:

  1. वित्तीय अनियमितताएं: सरकारी अनुदान और दान में मिली राशि के वितरण व उपयोग में कथित हेराफेरी।
  2. भूमि उपयोग में बदलाव: गौशाला की जमीनों का व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य निर्माण कार्यों के लिए अवैध रूप से उपयोग।
  3. अभिलेखों में हेरफेर: पशुधन (गायों की वास्तविक संख्या) के रिकॉर्ड में कथित अंतर और जानकारी छिपाना।
  4. असामान्य मृत्यु दर: गौशाला में गायों की असमय और असामान्य मृत्यु दर को लेकर भी संदेह जताया गया है।

तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित

​मुख्य सचिव कार्यालय के माध्यम से प्राप्त अधिवक्ता मुनीष कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत लीगल नोटिस के आधार पर राज्य सरकार ने मामले की गहराई से जांच के लिए एक तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया है।

​यह समिति गौशाला के तमाम दस्तावेजों, अनुदान, निर्माण कार्यों और भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रियाओं की गहन जांच कर रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। जांच समिति का ढांचा इस प्रकार है:

पद

नाम

अध्यक्ष

डॉ. हनुमान सहाय मीणा

सदस्य

डॉ. महेश कुमार शर्मा

सदस्य

डॉ. कौशल कुमार मंडावरा

सामाजिक संगठनों ने किया कार्रवाई का स्वागत

​”गौशालाओं के नाम पर मिलने वाले सरकारी अनुदान, जमीनों और व्यवस्थाओं में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। वास्तविक गौसेवा तभी संभव है जब नियमों की अनदेखी करने वाले भू-माफियाओं और भ्रष्ट प्रबंधकों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो।”

स्थानीय गौसेवक एवं सामाजिक संगठन

 

​गौसेवा के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं और सामाजिक संगठनों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। संगठनों को उम्मीद है कि सरकार राजधानी और प्रदेश की अन्य विवादित व अनियमितताओं से घिरी गौशालाओं पर भी इसी प्रकार का कड़ा रुख अपनाएगी ताकि बेजुबान गोवंश के अधिकारों और उनकी सुरक्षा की रक्षा की जा सके।

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