नई दिल्ली: नरेश गुनानी
केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पहाड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सड़क और सुरंग बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से बदलने के लिए व्यापक प्रयास कर रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने, रसद दक्षता में सुधार करने और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने के लिए बड़े पैमाने पर विकास कार्य चल रहे हैं।
जोजिला सुरंग की सफल स्थापना को एक नए भारत के उदय का प्रतीक बताते हुए गडकरी ने कहा कि ये बुनियादी ढांचा परियोजनाएं केवल परिवहन के साधन नहीं हैं, बल्कि आर्थिक विकास, पर्यटन, रोजगार सृजन और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख स्तंभ हैं।
1. लद्दाख को मजबूत करने वाली प्रमुख संपर्क परियोजनाएं
कारगिल और लेह-लद्दाख के बीच लगभग 18,000 करोड़ रुपये की सड़क और सुरंग परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनका उद्देश्य हर मौसम में लद्दाख के लिए साल भर संपर्क मजबूत करना है।
- कारगिल-ज़ांस्कर-पदुम राजमार्ग परियोजना: यह रणनीतिक संपर्क को मजबूत करने और सेना की आवाजाही को आसान बनाने के साथ-साथ ज़ांस्कर क्षेत्र तक पहुंच में सुधार कर रही है।
- लेह बाईपास परियोजनाएं: लेह शहर में यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए दक्षिण और उत्तर बाईपास विकसित किए जा रहे हैं। इससे श्रीनगर, मनाली और खारदुंग ला की ओर जाने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश किए बिना सुगम आवागमन मिलेगा।
- प्रस्तावित सुरंगें (ट्विन-ट्यूब टनल): फातु-ला ट्विन-ट्यूब टनल और केला पास टनल के निर्माण से पैंगोंग झील सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच हर मौसम में संभव हो सकेगी।
- मनाली-लेह मार्ग पर ऑल-वेदर कनेक्टिविटी: वर्तमान में इस मार्ग पर सीधी संपर्क व्यवस्था उपलब्ध है। यात्रा के समय को और कम करने के लिए इस मार्ग पर बारालाचा ला, लाचुलुंग ला और तांगलांग ला में नई सुरंग परियोजनाओं की योजना बनाई जा रही है।
2. जम्मू-कश्मीर में ₹1.35 लाख करोड़ का हाईवे नेटवर्क
जम्मू और कश्मीर में लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये की लागत से राजमार्ग विकास परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। इनमें पूर्ण हो चुके, चल रहे और आगामी कार्य शामिल हैं।
चार प्रमुख हाई-स्पीड कॉरिडोर
राज्य में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए चार प्रमुख हाई-स्पीड कॉरिडोर विकास के अधीन हैं:
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कॉरिडोर का नाम |
वर्तमान स्थिति और प्रभाव |
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जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर कॉरिडोर |
निर्माण कार्य पूरा होने वाला है; उन्नत राजमार्ग और सुरंग नेटवर्क से यात्रा का समय काफी कम होगा। |
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जम्मू-चेनानी-अनंतनाग कॉरिडोर |
चेनाब घाटी के जिलों और कश्मीर घाटी के बीच संपर्क को बेहतर बनाएगा। |
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श्रीनगर-बारामूला-उरी कॉरिडोर |
उत्तरी कश्मीर में लोगों और सामानों की सुगम आवाजाही को सुविधाजनक बनाएगा। |
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जम्मू-अखनूर-पूंछ कॉरिडोर |
तेजी से प्रगति पर है; सीमावर्ती जिलों में संपर्क सुधारने के साथ यात्रा का समय बचाएगा। |
3. रणनीतिक और सीमा संपर्क पहल
नितिन गडकरी ने रणनीतिक महत्व की कई आगामी परियोजनाओं पर प्रकाश डाला, जो सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच में सुधार करेंगी, पर्यटन को बढ़ावा देंगी और बागवानी गतिविधियों को समर्थन देंगी।
- नए कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स: कटरा-श्रीनगर हाई-स्पीड कॉरिडोर, रफीबाद-कुपवारा-चौकीबल-टंगधर सड़क परियोजना और श्रीनगर-सोनमर्ग-गुमरी कॉरिडोर पर काम योजना के तहत आगे बढ़ रहा है।
- पीर पंजाल-कश्मीर घाटी संपर्क: इस क्षेत्र के बीच संपर्क सुधारने के लिए सुरनकोट, बुफ्लियाज, सुपेन, दूधपथरी और मागम को जोड़ने वाले एक नए गलियारे (कॉरिडोर) की योजना बनाई जा रही है।
4. शहरी आवागमन के लिए रिंग रोड परियोजनाएं
शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ (जाम) की समस्या से निपटने के लिए दो प्रमुख रिंग रोड परियोजनाओं पर काम चल रहा है:
- श्रीनगर रिंग रोड: इसे कई चरणों में कार्यान्वित किया जा रहा है ताकि शहर में भीड़भाड़ कम हो सके और बारामूला, कुपवारा, बांदीपोरा, गुरेज, कारगिल और लेह की ओर सुगम आवागमन सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, समर्पित सहायक मार्गों के माध्यम से श्रीनगर हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन से संपर्क को भी मजबूत किया जा रहा है।
- जम्मू रिंग रोड: इसका विकास शहरी भीड़भाड़ को कम करने के लिए किया जा रहा है। इसका प्रस्तावित पूर्वी खंड क्षेत्रीय संपर्क को और मजबूत करेगा और कटरा (वैष्णो देवी) की ओर जाने वाला एक छोटा मार्ग प्रदान करेगा।
5. दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे
दिल्ली-अमृतसर-कटरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के माध्यम से देश की राजधानी और माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटरा के बीच तेज और अधिक कुशल संपर्क स्थापित होगा। यह आधुनिक पहुंच-नियंत्रित (एक्सेस-कंट्रोल) गलियारा उत्तरी भारत में आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा और जम्मू-कश्मीर तक पहुंच को बेहद सुगम बना देगा।