रिपोर्ट योगेश शर्मा
जयपुर। ओडिशा स्थित भगवान जगन्नाथ की पावन धरा एक बार फिर भक्ति, शक्ति और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम की साक्षी बनने जा रही है। दादिकेश्वर मित्र परिवार के तत्वावधान में आगामी 30 सितम्बर से 6 अक्टूबर तक जगन्नाथ पुरी में भव्य श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर जयपुर के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।
जयपुर में हुई बैठक: सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय
इस विराट आयोजन की रूपरेखा तैयार करने हेतु जयपुर स्थित मंगल गणेश मंदिर में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में शहर के प्रबुद्धजन, समाजसेवी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए। सभी की उपस्थिति में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस आयोजन को ऐतिहासिक और भव्य रूप दिया जाएगा, ताकि राजस्थान की भक्ति परंपरा की महक सात समंदर पार तक पहुंचे।
आचार्य घनश्याम दास के मुखारविंद से होगा कथा रसपान
श्रीमद् भागवत कथा, जिसे हिंदू धर्म का पंचम वेद माना जाता है, भक्त और भगवान के मिलन का मार्ग प्रशस्त करती है। इस सात दिवसीय ज्ञान महायज्ञ का वाचन सुप्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य श्री घनश्याम दास जी करेंगे। अपनी ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण शैली के लिए विख्यात आचार्य श्री, भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और धर्म के गूढ़ रहस्यों की व्याख्या कर श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर करेंगे।
आयोजन स्थल और व्यवस्थाएं
कथा का आयोजन श्री जगन्नाथ पुरी (ओडिशा) स्थित होटल रमानी के प्रांगण में किया जाएगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा है:
- आवास एवं भोजन: पुरी पहुंचने वाले भक्तों के लिए उत्तम आवास और सात्विक भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है।
- आवागमन: जयपुर से पुरी तक की यात्रा को सुगम बनाने के लिए परिवहन के विशेष प्रबंध किए गए हैं।
- निश्चिंत साधना: आयोजकों का लक्ष्य है कि भक्त बिना किसी सांसारिक चिंता के पूर्णतः आत्मिक शांति और कथा श्रवण में लीन रह सकें।
यात्रा शुल्क एवं पंजीकरण
कार्यक्रम के विवरण साझा करते हुए सौरव खंडेलवाल ने बताया कि समूह में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष पैकेज तैयार किया गया है। इसमें ट्रांसपोर्ट से लेकर ठहरने तक की सभी सुविधाएं शामिल हैं। प्रति यात्री एक निर्धारित शुल्क तय किया गया है, जिसकी जानकारी समिति के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।
”श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। जगन्नाथ पुरी जैसी सिद्ध भूमि पर इसका आयोजन भक्तों के लिए सौभाग्य की बात है।” — दादिकेश्वर मित्र परिवार
इस आयोजन से न केवल आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होगा, बल्कि राजस्थान और ओडिशा के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलेगी।