छाल/ बुधराम अग्रवाल/क्षेत्र के खनन प्रभावित ग्रामीणों की लंबे समय से लंबित मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच एक उच्चस्तरीय त्रिपक्षीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में रोजगार, पुनर्वास, स्वास्थ्य और शिक्षा समेत 10 मुख्य बिंदुओं पर विस्तृत विमर्श के बाद कई महत्वपूर्ण विषयों पर सैद्धांतिक व व्यावहारिक सहमति बनी।
रोजगार, HPC दर और 8 घंटे की कार्य पाली का मुद्दा प्रमुखता से उठा
बैठक में ग्रामीणों का पक्ष अधिवक्ता लालू ठाकुर ने रखा। उन्होंने प्रभावित परिवारों की आजीविका को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि भू-विस्थापन के बाद परिवारों के समक्ष सबसे बड़ा संकट रोजगार का होता है, अतः प्रक्रियागत देरी को समाप्त कर पात्र प्रभावितों को तत्काल स्थायी और संविदा रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
अधिवक्ता ठाकुर ने विशेष रूप से निम्नलिखित मांगें उठाईं:
- HPC (हाई पावर कमेटी) की दरें लागू करना: निजी व ठेका कंपनियों के तहत कार्यरत और प्रस्तावित श्रमिकों को HPC मानकों के अनुसार वेतन व पारिश्रमिक सुनिश्चित किया जाए।
- 8 घंटे की कार्य पाली (शिफ्ट): श्रमिकों से 8 घंटे से अधिक कार्य न लिया जाए तथा श्रम कानूनों का शत-प्रतिशत पालन हो।
- त्वरित नियोजन: रोजगार की पात्रता सूची में शामिल परिवारों को लंबी प्रतीक्षा से मुक्त कर तय समय-सीमा में नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं।
इन 10 प्रमुख विषयों पर हुआ मंथन
प्रशासन और SECL अधिकारियों की मौजूदगी में प्रभावित क्षेत्र के समग्र विकास और विस्थापन से जुड़ी चिंताओं पर बिंदुवार चर्चा की गई:
- रोजगार व सेवा शर्तें: पात्र परिवारों को शीघ्र नौकरी और निजी नियोजन में श्रम नियमों की बाध्यता।
- पुनर्वास एवं व्यवस्थापन: विस्थापित परिवारों के लिए सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर व बुनियादी ढांचा।
- पुनः सर्वेक्षण: छूटे हुए परिसंपत्तियों, मकानों व पात्र सदस्यों का त्रुटिरहित पुनः सर्वे।
- शेष बचत भूमि का प्रबंधन: ग्राम बांधापाली एवं खेदापाली की बची हुई अनुपयोगी या अधिगृहीत भूमि से जुड़े भूमि स्वामियों के अधिकार।
- स्वास्थ्य सुविधाएं: खनन क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, मोबाइल मेडिकल यूनिट और स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार केंद्र की मजबूती।
- शिक्षा का विस्तार: प्रभावित गांवों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण विद्यालय और छात्रवृत्ति संबंधी व्यवस्था।
- पेयजल संकट का निवारण: खदान क्षेत्रों में गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए स्थायी शुद्ध पेयजल आपूर्ति व्यवस्था।
- निर्बाध विद्युत आपूर्ति: पुनर्वास स्थलों और सीमावर्ती गांवों में ट्रांसफार्मर व लाइन विस्तार।
- EIA/EMP एवं CSR कार्य: पर्यावरण प्रबंधन योजना (EMP) का कड़ाई से पालन और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) मद से गांवों में बुनियादी निर्माण कार्य।
- ब्लास्टिंग से सुरक्षा: भारी ब्लास्टिंग से मकानों में आ रही दरारों की तकनीकी जांच, कंपन नियंत्रण और सुरक्षा मानकों की समीक्षा।
अधिकारियों का रुख और आगामी प्रक्रिया
प्रशासन और SECL प्रबंधन ने ग्रामीणों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए विभागीय नियमों और उपलब्ध प्रावधानों के तहत त्वरित समाधान का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ब्लास्टिंग की तीव्रता की जांच तकनीकी दल से कराई जाएगी तथा पेयजल और CSR से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता पर पूरा किया जाएगा। पूरे संवाद के दौरान माहौल शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक रहा।
त्रिपक्षीय वार्ता में बनी सहमति के बाद अब क्षेत्र के ग्रामीणों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक स्तर पर जारी होने वाले कार्यवृत्त (Minutes of Meeting) और SECL प्रबंधन द्वारा तय समय-सीमा में इन सहमतियों को धरातल पर कैसे उतारा जाता है।