छाल की बेटी महिमा चंद्रा ने दुर्ग में गाड़ा सफलता का झंडा: राष्ट्रीय नृत्य प्रतियोगिता में बनीं चैंपियन
| रिपोर्ट गणपत चौहान छत्तीसगढ़
छाल/रायगढ़। रायगढ़ जिले के छोटे से क्षेत्र छाल का नाम अब राष्ट्रीय फलक पर चमक उठा है। दुर्ग में आयोजित ‘नाट्य नृत्य’ अखिल भारतीय नृत्य, संगीत एवं फाइन आर्ट प्रतियोगिता में छाल की होनहार बेटी महिमा चंद्रा ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए जूनियर वर्ग में प्रथम स्थान हासिल किया है। इस जीत के बाद पूरे छाल क्षेत्र में खुशी और जश्न का माहौल है।

देशभर के कलाकारों के बीच छाल की नृत्यांगना का दबदबा
’कथक रॉकर्स’ संस्था द्वारा दुर्ग के कुशाभाऊ ठाकरे भवन में 23 से 28 दिसंबर तक आयोजित इस छह दिवसीय महोत्सव में देशभर के विभिन्न राज्यों से कलाकारों ने हिस्सा लिया था। जूनियर कैटेगरी में अपनी शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति के दौरान महिमा ने सधे हुए पद संचालन और मनमोहक भाव-भंगिमाओं से निर्णायकों को इस कदर प्रभावित किया कि उन्हें प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ नर्तक घोषित किया गया।
तकनीक और परंपरा का संगम: ऑनलाइन ली शिक्षा
महिमा की यह जीत उन सभी के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी को बाधा मानते हैं। महिमा पिछले एक वर्ष से छाल में रहकर ही खैरागढ़ विश्वविद्यालय की गोल्ड मेडलिस्ट गुरु श्रीमती प्रीति चंद्रा से ऑनलाइन माध्यम के जरिए कथक का कड़ा प्रशिक्षण ले रही हैं। गुरु के मार्गदर्शन और महिमा की लगन का ही परिणाम है कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर यह गौरव हासिल किया।
क्षेत्र में हर्ष की लहर: परिजनों और ग्रामीणों ने जताया गर्व
जैसे ही महिमा की जीत की खबर छाल पहुंची, उनके निवास पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कला प्रेमियों ने इसे छाल के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है।
- परिजनों का कहना है: “महिमा ने दिन-रात अभ्यास कर यह मुकाम पाया है। छोटे क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय मंच पर प्रथम आना हमारे पूरे परिवार और गांव के लिए गर्व की बात है।”
- गुरु प्रीति चंद्रा ने भी अपनी शिष्या की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
महोत्सव का उद्देश्य
आयोजकों के अनुसार, इस प्रतियोगिता का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाना था। महिमा जैसी प्रतिभाओं की सफलता यह दर्शाती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती।