छह माह बाद भी नहीं मिला स्थायी प्रभार, शिक्षा व्यवस्था अधर में

छत्तीसगढ़ समाचार 


छह माह बाद भी नहीं मिला स्थायी प्रभार, शिक्षा व्यवस्था अधर में

घरघोड़ा विकासखंड में प्रभारी BEO की नियुक्ति बनी कागजी खानापूर्ति, विभागीय उदासीनता पर उठे सवाल

Edited By : गणपत चौहान 
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 09,2025

रायगढ़ (छत्तीसगढ़)।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है, लेकिन रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड में यह व्यवस्था खुद ही अधर में लटकी हुई है। जिला शिक्षा कार्यालय रायगढ़ द्वारा 31 अक्टूबर 2023 को जारी आदेश के तहत सुंदरमणि कौँध, प्रधान पाठक (BRC, घरघोड़ा), को विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) का प्रभारी नियुक्त किया गया था।

आदेश (क्रमांक 656/स्था.1/आ.सा.वि./2023-24) में स्पष्ट निर्देश था कि उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यभार ग्रहण कर प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करना है। साथ ही यह भी उल्लेख था कि आदेश स्वतः समाप्त नहीं माना जाएगा।

आदेश जारी… लेकिन अमल नहीं

हैरानी की बात यह है कि छह माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी न तो उन्हें विधिवत कार्यभार सौंपा गया, और न ही उन्हें BEO के रूप में स्वतंत्र रूप से कार्य करने की छूट दी गई। ऐसे में सवाल यह उठता है कि –

  • क्या जिला शिक्षा अधिकारी का आदेश सिर्फ एक औपचारिक दस्तावेज था?
  • अगर आदेश का पालन नहीं होना था, तो उसे जारी करने की जरूरत क्या थी?
  • क्या किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के चलते आदेश पर अमल नहीं हो पाया?
  • और सबसे अहम सवाल — घरघोड़ा विकासखंड की शिक्षा व्यवस्था फिलहाल किसके जिम्मे है?

शिक्षकों में नाराजगी, शिक्षा व्यवस्था प्रभावित

स्थानीय शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि जिला शिक्षा अधिकारी के आदेशों की ही पालना नहीं होगी, तो फिर व्यवस्था की नैतिकता और अनुशासन कैसे कायम रह पाएगा?

वर्तमान में प्रभारी BEO की नियुक्ति अधूरी रहने से विकासखंड के शैक्षणिक कार्यक्रमों, निरीक्षण, प्रशासनिक संचालन, शिक्षकों की समस्याओं के समाधान, और नीतियों के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो रही है। यह स्थिति केवल एक व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि पूरे विकासखंड की शिक्षा गुणवत्ता पर प्रभाव डाल रही है।

उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की मांग

शिक्षा से जुड़े लोगों, संगठनों और शिक्षकों ने इस विषय पर उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि नियुक्त अधिकारी को जल्द से जल्द विधिवत कार्यभार ग्रहण कराया जाए ताकि शिक्षा व्यवस्था फिर से संगठित रूप में संचालित हो सके।


 

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